बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम तेजी से चर्चा में है—Nishant Kumar। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे निशांत हाल ही में ईद के मौके पर कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आए, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। खास बात यह रही कि वे उन जगहों पर भी दिखाई दिए जहां आमतौर पर खुद मुख्यमंत्री की मौजूदगी होती है। इतना ही नहीं, कुछ मौकों पर उन्होंने जेडीयू का प्रतिनिधित्व भी किया। उनकी इस सक्रियता ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे धीरे-धीरे अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने की तैयारी कर रहे हैं।
सत्तापक्ष ने बताया ‘सामाजिक उपस्थिति’, विपक्ष ने उठाए सवाल
निशांत कुमार (Nishant Kumar) की बढ़ती सक्रियता को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक सामाजिक और पारिवारिक उपस्थिति है, इसे राजनीति से जोड़कर देखना सही नहीं है। वहीं जेडीयू के प्रवक्ताओं ने भी साफ किया कि निशांत पार्टी से जुड़े हैं और सभी धर्मों के कार्यक्रमों में शामिल होना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता Snehashish Vardhan ने कहा कि जो नेता खुद को समाजवादी बताते हैं, वे अब परिवारवाद की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार अपने बेटे को स्थापित करने के लिए हर मंच पर साथ लेकर जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही संकेत नहीं है।
राजद ने भी दिया बयान, जनता पर छोड़ा फैसला
इस पूरे मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता Mrityunjay Tiwari ने कहा कि अगर निशांत कुमार (Nishant Kumar) राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है और वही तय करेगी कि वे उन्हें स्वीकार करती है या नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निशांत कुमार की बढ़ती सक्रियता कोई साधारण बात नहीं है। जिस तरह से वे लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं, उससे यह संकेत जरूर मिलता है कि आने वाले समय में वे सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि अभी तक उनकी ओर से इस पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा और भी अहम हो गया है। निशांत कुमार (Nishant Kumar) की सक्रियता ने जेडीयू के भीतर और बाहर दोनों जगह नई चर्चा छेड़ दी है। कुछ लोग इसे राजनीतिक तैयारी मान रहे हैं, तो कुछ इसे महज संयोग बता रहे हैं।
फिलहाल यह साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में यह मुद्दा और जोर पकड़ेगा। क्या निशांत कुमार वाकई अपने पिता की विरासत संभालेंगे या यह सिर्फ एक सियासी चर्चा है—इसका जवाब समय ही देगा। लेकिन इतना तय है कि उनकी हर गतिविधि पर अब राजनीतिक दलों और जनता की नजर बनी रहेगी।
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