भोजपुर: बिहार के भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में परिवार की ओर से सरकार के सामने एक बार फिर न्याय की मांग रखी गई है। सरकार ने न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट मिलने के बाद भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। लेकिन भरत तिवारी की मां आशा देवी ने साफ कहा है कि उनके परिवार को पैसे या नौकरी से ज्यादा अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए। उन्होंने सरकार से भरत तिवारी को शहीद का दर्जा देने की मांग की है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर परिवार के घर के बाहर तिरंगा फहराया गया और इस दौरान भी न्याय की मांग उठी।
तिरंगे के नीचे मां ने बेटे के लिए उठाई न्याय की आवाज
15 अगस्त के मौके पर भरत तिवारी के घर के बाहर तिरंगा फहराया गया। परिवार के सदस्यों के साथ गांव के कई लोग भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। तिरंगे को सलामी देने के बाद भरत तिवारी के लिए न्याय की मांग सामने आई। उनकी मां आशा देवी ने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद और नौकरी उनके लिए सबसे बड़ी जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, बेटे की मौत के बाद परिवार की पहली प्राथमिकता यह जानना है कि उसके साथ क्या हुआ और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई हुई। आशा देवी ने सरकार से अपील की कि उनके बेटे को शहीद का दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि भरत ने लोगों के लिए अपनी जान गंवाई और परिवार चाहता है कि उसके बलिदान को उचित सम्मान मिले।
परिवार ने आरोपितों पर कार्रवाई की मांग की
भरत तिवारी की मां के साथ उनके भाई चंदन तिवारी ने भी मामले में कार्रवाई की मांग दोहराई। परिवार का कहना है कि जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर मामले में आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। आशा देवी ने आरोपित लोगों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक परिवार खुद को न्याय मिला हुआ नहीं मान सकता। वहीं चंदन तिवारी ने सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और नौकरी के फैसले का स्वागत किया, लेकिन उन्होंने भी साफ किया कि परिवार की सबसे पहली मांग न्याय है। उनका कहना है कि सहायता अपनी जगह है, लेकिन अगर मामले में कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होना जरूरी है।
न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट से बढ़ी उम्मीद
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग बनाया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट बिहार सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार की ओर से परिवार को आर्थिक मदद और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई। इस फैसले के बाद परिवार की नजर अब मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर है। हालांकि, अंतरिम रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष या सिफारिशें की गई हैं, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद ही मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। परिवार लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय हो और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
‘मदद नहीं, बेटे के सम्मान और न्याय की लड़ाई’
भरत तिवारी के परिवार का कहना है कि सरकार की ओर से घोषित मदद को वह नकार नहीं रहे हैं, लेकिन उनके लिए बेटे की मौत से जुड़े सवालों का जवाब मिलना ज्यादा महत्वपूर्ण है। आशा देवी चाहती हैं कि भरत तिवारी को शहीद का दर्जा मिले और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई हो। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर घर के बाहर तिरंगा फहराने के दौरान परिवार ने एक बार फिर अपनी मांग दोहराई। परिवार की नजर अब न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और आरोपों को लेकर जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।
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