Homeराजनीति‘लोकतंत्र BJP की जागीर नहीं है!’—TMC सांसदों की गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी...

‘लोकतंत्र BJP की जागीर नहीं है!’—TMC सांसदों की गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी का सबसे तीखा वार

दिल्ली में गृह मंत्रालय के बाहर TMC सांसदों की गिरफ्तारी पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भड़क गईं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया और केंद्र सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

-

दिल्ली की सियासत उस समय गरमा गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद केंद्रीय गृह मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा, शताब्दी रॉय, कीर्ति आजाद समेत कई नेताओं ने पश्चिम बंगाल में हालिया ईडी कार्रवाई के विरोध में गृह मंत्रालय के सामने नारेबाजी की। सांसदों का आरोप था कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई सांसदों को हिरासत में ले लिया। सांसदों को पुलिस वैन में बैठाकर ले जाया गया, जिसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया। संसद सदस्य होने के बावजूद इस तरह की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

ममता बनर्जी का तीखा बयान

इस पूरे घटनाक्रम पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर निशाना साधा। ममता बनर्जी ने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है और इसे गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सांसदों के साथ किए गए व्यवहार को “शर्मनाक और गलत” बताया। ममता ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन एक बुनियादी अधिकार होता है, लेकिन यहां सत्ता के बल पर आवाज दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सांसदों को जबरन हटाना और घसीटना कानून की भावना के खिलाफ है, जो वर्दी में घमंड को दर्शाता है।

‘दोहरा मापदंड’ और लोकतंत्र की परिभाषा पर सवाल

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने बयान में केंद्र सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जब सत्ताधारी दल के नेता प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन जब विपक्ष अपनी बात रखता है तो उसे हिरासत और अपमान का सामना करना पड़ता है। ममता ने साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र सत्ता में बैठे लोगों की सुविधा या आराम से नहीं चलता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज्ञाकारिता को लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता और असहमति ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की असली पहचान है। उनका कहना था कि अगर विपक्ष की आवाज को दबाया जाएगा, तो यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ होगा। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है कि क्या केंद्र सरकार विरोध की आवाजों को सहन कर पा रही है या नहीं।

‘सम्मान आपसी होता है’, गिरफ्तारी के बाद बढ़ता टकराव

ममता बनर्जी ने अपने बयान के अंत में कहा कि सम्मान एकतरफा नहीं होता, यह आपसी होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के अधिकार किसी कुर्सी या सत्ता की कृपा पर निर्भर नहीं हैं। उनका कहना था कि कोई भी सरकार, कोई भी दल या कोई भी गृहमंत्री यह तय नहीं कर सकता कि लोकतंत्र में किसे सम्मान और गरिमा मिलेगी। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली में गिरफ्तार किए गए सांसदों की रिहाई और इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। इस घटना के बाद यह साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की गर्मी अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। यह मामला सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।

Read More-हिजाब पर बैन के बीच ओवैसी का बड़ा ऐलान, ‘देश की PM होगी हिजाब पहनने वाली महिला’

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts