महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र और संविधान की ताकत इतनी मजबूत है कि आने वाले समय में हिजाब पहनने वाली महिला भी देश की प्रधानमंत्री बन सकती है। ओवैसी ने यह बात हिजाब और बुर्का को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में कही। हाल ही में बिहार के एक ज्वेलरी शॉप द्वारा हिजाब-बुर्का पहनकर आने वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने का मामला सामने आया था, जिसने पूरे देश में चर्चा को जन्म दिया। ओवैसी ने इस फैसले को समाज में भेदभाव बढ़ाने वाला बताया और कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि किसी की पहचान, पहनावा या धर्म उसके सपनों और क्षमताओं को सीमित नहीं कर सकता।
संविधान की ताकत पर भरोसा
अपने भाषण में ओवैसी ने भारत के संविधान की खुलकर तारीफ की और कहा कि यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है कि यहां कोई भी व्यक्ति, किसी भी पृष्ठभूमि से आकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा ज्यादा मजबूत और समावेशी है, जहां अवसर सबके लिए खुले हैं। ओवैसी ने कहा कि अगर आज हिजाब को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो यह संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा, समानता और अधिकार ही किसी भी समाज को आगे बढ़ाते हैं। इसी क्रम में उन्होंने मुस्लिम लड़कियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और कहा कि ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है, जो किसी भी भेदभाव को खत्म कर सकता है। ओवैसी ने सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख जैसी महान महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी सोच आज भी देश को नई दिशा देने की ताकत रखती है।
अजित पवार पर सीधा हमला, महायुति को बताया ‘त्रिमूर्ति’
सभा के दौरान ओवैसी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने उप मुख्यमंत्री अजित पवार को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें वोट देने का मतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन करना है। ओवैसी ने पीएम मोदी, एकनाथ शिंदे और अजित पवार को ‘त्रिमूर्ति’ बताते हुए कहा कि यह गठजोड़ जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता असली मुद्दों से ध्यान भटकाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। ओवैसी ने यह भी कहा कि वक्फ कानून और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों पर सरकार का रवैया साफ नहीं है। उन्होंने जनता से अपील की कि वोट देने से पहले यह समझें कि उनका एक-एक वोट किस दिशा में जा रहा है और किस विचारधारा को मजबूत कर रहा है।
स्थानीय वादों से लेकर राष्ट्रीय संदेश तक, भाषण में दिखी पूरी रणनीति
ओवैसी का भाषण सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने सोलापुर की जनता के लिए कई स्थानीय वादे भी किए। उन्होंने कहा कि इलाके में 16 इंच की नई पानी की पाइपलाइन बिछाई जाएगी, सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी और गरीबों के लिए एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने प्रॉपर्टी कार्ड और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े विवादों को सुलझाने का भी भरोसा दिलाया। ओवैसी ने अपने भाषण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी राजनीति सिर्फ पहचान की नहीं, बल्कि विकास और अधिकारों की भी है। हिजाब पहनने वाली महिला के प्रधानमंत्री बनने वाले बयान को उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और समान अवसरों से जोड़ते हुए एक बड़े विजन के रूप में पेश किया, जिसने समर्थकों के साथ-साथ विरोधियों का भी ध्यान खींच लिया।
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