बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही विपक्ष और अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि भले ही सम्राट चौधरी भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बने हों, लेकिन इस फैसले के पीछे असल प्रभाव नीतीश कुमार की इच्छा का दिखाई देता है। पप्पू यादव के इस बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है और यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इस बदलाव के पीछे किसकी रणनीति सबसे ज्यादा प्रभावी रही।
‘BJP में सन्नाटा’—पप्पू यादव का आरोप
पप्पू यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने के बावजूद पार्टी के भीतर उत्साह नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने इसे “अजीब सन्नाटा” बताते हुए सवाल उठाया कि क्या यह फैसला पूरी तरह बीजेपी का था या इसमें सहयोगी दल की भूमिका ज्यादा रही। उनके मुताबिक, बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की सोच पर भी नीतीश कुमार की मर्जी भारी पड़ गई। यह बयान सीधे तौर पर एनडीए के भीतर के समीकरणों पर सवाल खड़ा करता है और यह संकेत देता है कि गठबंधन की राजनीति में अंदरूनी संतुलन कितना अहम होता है।
‘मोदी-नीतीश मॉडल’ पर सरकार चलाने का दावा
वहीं, मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार ‘मोदी-नीतीश मॉडल’ पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास और समृद्धि के लिए तुरंत काम शुरू किया जाएगा और केंद्र व राज्य के सहयोग से बिहार को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे पहले नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दिया था। अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह विकास की गति को तेज करेगी और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करेगी।
बधाइयों के बीच सियासी खींचतान जारी
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद एनडीए के कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी और उनके नेतृत्व में बिहार के विकास की उम्मीद जताई। प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की बात भी दोहराई गई। खुद नीतीश कुमार ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए भरोसा जताया कि बिहार तेजी से प्रगति करेगा। हालांकि, दूसरी ओर विपक्ष और कुछ अन्य नेताओं के बयान इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि यह बदलाव पूरी तरह सहज नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार किस तरह काम करती है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अपनी दिशा तय करती है।
Read More-सम्राट की ताजपोशी के पीछे किन 3 दिग्गजों का खेल? पिता शकुनी चौधरी का बड़ा खुलासा चौंकाने वाला!
