पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के जालंधर स्थित आवास और उनकी निजी यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने छापेमारी की। इस कार्रवाई के सामने आते ही मामला सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीतिक रंग ले लिया। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक वजह भी हो सकती है। हालांकि, ED की ओर से अभी तक इस रेड को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
AAP का आरोप—राघव चड्ढा की भूमिका पर सवाल
आम आदमी पार्टी ने इस मामले में अपने ही नेता राघव चड्ढा पर अप्रत्यक्ष तौर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने दावा किया कि हाल ही में राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा नाराज थे। इस पद पर अशोक मित्तल की नियुक्ति के कुछ ही समय बाद उनके घर पर ED की रेड होना कई सवाल खड़े करता है। ढांडा ने इसे “संयोग” मानने से इनकार करते हुए कहा कि घटनाओं की टाइमिंग संदेह पैदा करती है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि इस मामले में अंदरूनी राजनीतिक खींचतान की भूमिका हो सकती है।
बीजेपी से मुलाकात और ‘साजिश’ का दावा
AAP ने अपने आरोपों को और गंभीर बनाते हुए यह भी कहा कि राघव चड्ढा की हाल के दिनों में बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात हुई थी। पार्टी का दावा है कि इसी दौरान कथित तौर पर अशोक मित्तल के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई गई। अनुराग ढांडा ने कहा कि उनके पास ऐसी जानकारियां हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि इस रेड के पीछे एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का मकसद राजनीतिक दबाव बनाना और आगामी चुनावों से पहले माहौल तैयार करना हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अब तक न तो राघव चड्ढा और न ही बीजेपी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच बढ़ा सस्पेंस
इस पूरे मामले ने पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां AAP इसे साजिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि ED की छापेमारी के पीछे क्या ठोस कारण हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक बयान सामने आएंगे। ऐसे में यह मामला केवल एक जांच तक सीमित नहीं रहकर, बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले सकता है।
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