पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस उस वक्त चर्चा का विषय बन गई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अचानक एक सवाल पर नाराज हो गए। चुनावी माहौल पहले से ही गरम था और इसी बीच पत्रकारों के सवाल-जवाब का सिलसिला चल रहा था। शाह बंगाल में अपनी पार्टी की रणनीति और चुनावी मुद्दों पर खुलकर बात कर रहे थे। लेकिन एक सवाल ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। यह घटना उस समय हुई जब राज्य में पहले चरण की वोटिंग के बाद राजनीतिक दल अगले चरण की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि वह चुनाव से “दो-तीन दिन पहले” बंगाल आए हैं। यह सुनते ही अमित शाह ने तुरंत आपत्ति जताई और कहा कि वह केवल दो-तीन दिन नहीं बल्कि पिछले 14 दिनों से लगातार बंगाल में मौजूद हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह उनके काम और समय को “कम करके” दिखाया जा रहा है। शाह ने सवाल पूछने वाले को बीच में ही रोकते हुए कहा कि “ऐसी भाषा में सवाल मत पूछिए।” इसके बाद उन्होंने उस सवाल का जवाब देने से भी इनकार कर दिया। उनका यह रिएक्शन तुरंत चर्चा में आ गया और प्रेस कॉन्फ्रेंस का फोकस बदल गया।
अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना
अमित शाह ने अपने जवाब में इस सवाल की भाषा को अभिषेक बनर्जी की शैली से जोड़ते हुए कहा कि यह “उसी तरह की भाषा” है, जिसका वह जवाब नहीं देना चाहते। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “मैं ऐसी ओछी बातों का जवाब नहीं देता।” इस दौरान पत्रकार अपना सवाल पूरा भी नहीं कर पाया और बीच में ही रुक गया। शाह का यह बयान राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे साफ है कि चुनावी माहौल में शब्दों और भाषा को लेकर भी सख्त प्रतिक्रिया दी जा रही है। यह घटना सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गई।
मतदाताओं से अपील और आगे की रणनीति
इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद अमित शाह ने अपने संबोधन में चुनावी मुद्दों पर बात जारी रखी। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे बिना किसी डर के मतदान करें और अपने अधिकार का इस्तेमाल करें। शाह ने कहा कि चुनाव आयोग ने इस बार मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए बेहतर इंतजाम किए हैं। उन्होंने लोगों से पुराने चुनावी अनुभवों को भूलकर “बंगाल के बेहतर भविष्य” के लिए वोट करने की बात कही। साथ ही उन्होंने भाजपा की सरकार बनाने का आह्वान भी किया। इस घटना ने जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को सुर्खियों में ला दिया, वहीं यह भी दिखाया कि चुनाव के दौरान हर बयान और हर प्रतिक्रिया कितनी अहम हो जाती है।
