पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 23 अप्रैल को हुए मतदान में औसतन 92.88 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जो राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। 16 जिलों की 152 सीटों पर जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और लोकतंत्र के प्रति अपनी मजबूत भागीदारी दिखाई। कूचबिहार, मालदा, बीरभूम और दक्षिण दिनाजपुर जैसे जिलों में 94 से 96 प्रतिशत तक मतदान दर्ज किया गया, जो अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर वोटिंग होना आमतौर पर किसी बड़े बदलाव या जनता के गहरे रुझान की ओर इशारा करता है।
केजरीवाल का बयान बना चर्चा का केंद्र
इस रिकॉर्ड वोटिंग पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया ने सियासी बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि “सुनने में आ रहा है कि पश्चिम बंगाल में जमकर SIR के खिलाफ वोट पड़ रहा है। मोदी जी का SIR उनके ही खिलाफ जा रहा है।” केजरीवाल के इस बयान को सीधे तौर पर केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी की नीतियों पर निशाना माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में SIR का स्पष्ट अर्थ नहीं बताया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
जिलों में वोटिंग का विस्तृत आंकड़ा
अगर जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जलपाईगुड़ी में 94.65 प्रतिशत, झाड़ग्राम में 92.26 प्रतिशत और कलिम्पोंग में 83.07 प्रतिशत वोटिंग हुई। वहीं मालदा में 94.46 प्रतिशत, मुर्शिदाबाद में 93.61 प्रतिशत और पश्चिम मेदिनीपुर में 92.18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसके अलावा कूचबिहार में 96.04 प्रतिशत, दक्षिण दिनाजपुर में 95.44 प्रतिशत और उत्तर दिनाजपुर में 94.16 प्रतिशत वोटिंग हुई। दार्जिलिंग में 88.80 प्रतिशत और पुरुलिया में 90.95 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि राज्य के लगभग हर हिस्से में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खास बात यह है कि ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में वोटिंग प्रतिशत काफी ऊंचा रहा, जो चुनावी जागरूकता को दर्शाता है।
क्या यह एंटी-इंकंबेंसी का संकेत है?
इतिहास के आंकड़ों से तुलना करें तो 2021 के विधानसभा चुनावों में कुल 81.56 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा 92.88 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इसे एंटी-इंकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर का संकेत भी मान रहे हैं। हालांकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी दोनों ही अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। TMC का कहना है कि यह जनता के उनके विकास कार्यों पर भरोसे का नतीजा है, जबकि BJP इसे बदलाव की लहर बता रही है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में हुई यह रिकॉर्ड वोटिंग आने वाले चुनावी परिणामों को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ा रही है।
