उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। शंभूपुर गांव में दो पंडितों और अपनी पत्नी की निर्मम हत्या करने वाले मुख्य आरोपी अरविंद सिंह के मामले में पुलिस ने एक बड़ा खुलासा किया है। शुरुआती दौर में यह आशंका जताई जा रही थी कि क्रॉस फायरिंग के दौरान मासूम बेटे की जान चली गई होगी, लेकिन डीजीपी मुख्यालय द्वारा जारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मासूम बच्चे की मौत पुलिस की गोली से नहीं, बल्कि खुद आरोपी पिता अरविंद सिंह की .32 बोर की रिवॉल्वर से चली गोली के कारण हुई थी। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और हर कोई हैरान है कि कोई पिता अपने ही जिगर के टुकड़े के साथ ऐसा कैसे कर सकता है।
वैज्ञानिक सबूत और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के 3 सबसे बड़े आधार
पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर ऐसे तीन ठोस तथ्य रखे हैं जो यह साबित करते हैं कि गोली आरोपी ने ही चलाई थी। सबसे पहले, बच्चे के शरीर पर बने ‘एंट्री वुंड’ पर ब्लैकनिंग और टैटूइंग के निशान मिले हैं, जो केवल एक फीट से भी कम यानी बेहद नजदीक से गोली चलाने पर ही संभव हैं, जबकि मुठभेड़ के दौरान पुलिस काफी दूर थी। दूसरा, गोली की ट्रैजेक्टरी यानी दिशा नीचे से तिरछे ऊपर की तरफ थी, जो यह दर्शाती है कि बच्चा उस समय आरोपी की गोद में या उसकी सीधी पकड़ में था। तीसरा, बच्चे के घाव का आकार .32 बोर की रिवॉल्वर से पूरी तरह मेल खाता है, जबकि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 9 एमएम पिस्टल के घाव का आकार इससे बड़ा होता है।
10 साल की चश्मदीद बेटी की गवाही और आरोपी की क्रूरता
इस दिल दहला देने वाली घटना की सबसे बड़ी चश्मदीद आरोपी की 10 साल की मासूम बेटी है, जिसे आरोपी ने बंधक बनाकर अपनी ढाल (शील्ड) के रूप में इस्तेमाल किया था। गनीमत रही कि पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए इस बच्ची को सकुशल रेस्क्यू कर लिया। पुलिस के अनुसार, उस डरी हुई बच्ची ने अपने बयान में खुद इस बात का खुलासा किया है कि उसके पिता ने ही उसके भाई को गोली मारी थी। इसके अलावा, जांच में यह बात भी सामने आई है कि अरविंद अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद बेहद आक्रामक और मानसिक रूप से उग्र हो चुका था। वह लगातार अपनी मां, चाचा और अन्य परिजनों को भी जान से मारने की धमकियां दे रहा था, जिससे उसकी क्रूर मानसिकता का साफ पता चलता है।
पुलिस एनकाउंटर और आगे की कानूनी कार्रवाई
आपको बता दें कि सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी अरविंद सिंह को पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मार गिराया गया था। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिस समय पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, तब आरोपी बच्चों से काफी दूर कमरे के दूसरे छोर पर था। पुलिस के न्यूट्रलाइज करने के बाद ही सुरक्षाकर्मी बच्चों तक पहुंच सके थे। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है और फॉरेंसिक तथा चश्मदीद के बयानों को कोर्ट में पेश करने की तैयारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि किस तरह घरेलू हिंसा और आपराधिक प्रवृत्ति इंसान को इतना अंधा बना देती है कि वह अपनों का भी खून बहाने से नहीं हिचकिचाता।
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