BRICS Summit 2026 की औपचारिक शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें तमिल की प्रसिद्ध रचना तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन साहित्यिक और दार्शनिक परंपरा की झलक मानी जाती है। तिरुक्कुरल के लेखक संत तिरुवल्लुवर थे, जिन्हें तमिल समाज में बेहद सम्मान के साथ याद किया जाता है। इसका रूसी अनुवाद नायरा ने किया है और इसे सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल ने प्रकाशित किया है।
कौन थे संत तिरुवल्लुवर?
संत तिरुवल्लुवर तमिल भाषा के महान कवि और दार्शनिक माने जाते हैं। उनके जीवनकाल को लेकर इतिहासकारों में एक राय नहीं है और अलग-अलग विद्वान उन्हें अलग-अलग समय का बताते हैं। उनकी सबसे खास बात यह है कि उनकी शिक्षाएं किसी एक धर्म, जाति या समुदाय तक सीमित नहीं मानी जातीं। तिरुवल्लुवर ने इंसान के अच्छे आचरण, नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी, शासन व्यवस्था और रिश्तों जैसे विषयों पर विचार रखे। यही वजह है कि उनकी रचनाओं को आज भी तमिल संस्कृति और भारतीय चिंतन की महत्वपूर्ण विरासत माना जाता है।
1330 दोहों में समाई जीवन की बड़ी सीख
तिरुवल्लुवर की सबसे प्रसिद्ध रचना तिरुक्कुरल है। इसमें कुल 1330 दोहे हैं और प्रत्येक दोहे को ‘कुरल’ कहा जाता है। पूरी रचना को तीन बड़े हिस्सों में बांटा गया है। पहला अराम है, जो नैतिकता, सदाचार और अच्छे व्यवहार पर जोर देता है। दूसरा पोरुल है, जिसमें शासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारियों जैसे विषय शामिल हैं। तीसरा इन्बम है, जो प्रेम और मानवीय रिश्तों से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित है। कम शब्दों में गहरी बात कहने की वजह से तिरुक्कुरल को तमिल साहित्य की महान रचनाओं में गिना जाता है।
किताब के पीछे क्या है मोदी का संदेश?
पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण देना भारत की सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने रखने का एक तरीका भी माना जा सकता है। इस किताब में नैतिक जीवन से लेकर शासन और मानवीय रिश्तों तक की बातें हैं, जो किसी एक देश या समाज तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में यह उपहार भारत-रूस संबंधों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश भी देता है। प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की अलग-अलग भाषाओं और परंपराओं की विरासत को सामने रखते रहे हैं। पुतिन को तिरुक्कुरल भेंट करना इसी व्यापक सांस्कृतिक संदेश की एक झलक है।
