ब्रिक्स समिट के दौरान 12 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने चीन की ओर से मिले समर्थन और सहयोग के लिए शी जिनपिंग का आभार जताया। इस बैठक को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों को लेकर भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के लिए जरूरी है। वहीं चीन सीमा विवाद को अन्य द्विपक्षीय मुद्दों से अलग रखने की बात करता रहा है।
LAC और अरुणाचल प्रदेश को लेकर क्या हुई बात?
बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जुलाई में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबानसिरी जिले के ताकसिंग इलाके में बने तनाव के बाद दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत हुई थी। भारत का रुख साफ है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है। चीन की ओर से राज्य के कई स्थानों के नाम बदलने को लेकर आपत्ति जताई जाती रही है। पूर्वी क्षेत्र में सीमा से जुड़े मतभेदों के अलावा ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का मुद्दा भी भारत के लिए अहम है। भारत को आशंका है कि तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर बनने वाली इस परियोजना का असर निचले क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
#WATCH | Delhi: During the bilateral meeting with Chinese President Xi Jinping, PM Narendra Modi says, “I express my gratitude for the support and cooperation received from China during India’s BRICS chairmanship. We now have the opportunity to discuss bilateral cooperation. Once… pic.twitter.com/f0Zdc4ZPIq
— ANI (@ANI) September 12, 2026
व्यापार और सप्लाई चेन की मुश्किलें भी बैठक में उठीं
भारत-चीन संबंधों में व्यापार एक और बड़ा मुद्दा है। बैठक में भारतीय सामानों के लिए चीन के बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा हुई। भारतीय कंपनियों को चीन से मशीनरी, उपकरण और स्पेयर पार्ट्स हासिल करने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ तकनीकी सामानों और उपकरणों के निर्यात से जुड़ी पाबंदियां भी चिंता का कारण बनी हुई हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने और कारोबारी माहौल बेहतर करने की जरूरत पर जोर दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे क्षेत्रों में कुछ राहत के संकेत भी दिखाई दिए हैं।
क्या रिश्तों में आएगी नई गर्माहट?
पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात का सबसे बड़ा संदेश दोनों देशों के बीच संवाद जारी रखने को लेकर माना जा रहा है। भारत चाहता है कि सीमा पर शांति के साथ आर्थिक और कारोबारी संबंधों में भी स्थिरता आए। वहीं दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को बातचीत और पहले से तय व्यवस्थाओं के जरिए सुलझाने पर जोर दिया जा सकता है। ऐसे में यह बैठक सिर्फ तत्काल विवादों को संभालने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि भारत-चीन संबंधों को लंबे समय में अधिक स्थिर बनाने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखी जा रही है। अब नजर इस बात पर होगी कि बैठक के बाद दोनों देश जमीन पर कितनी तेजी से ठोस फैसले लागू करते हैं।
