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पुरुषों के प्राइवेट पार्ट पर टिप्पणी पड़ी भारी! MBBS छात्रा सेजल पवार की कॉलेज में एंट्री बैन

पुरुषों के प्राइवेट पार्ट्स पर विवादित टिप्पणी के बाद KEM हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज ने MBBS छात्रा सेजल पवार को 15 दिन की अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया है। कॉलेज, हॉस्टल और कैंपस में एंट्री पर भी रोक लगा दी गई है।

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मुंबई के प्रतिष्ठित KEM हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज की MBBS छात्रा सेजल पवार इन दिनों एक वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणीत मोरे के एक कॉमेडी शो का क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने उनके खिलाफ प्रारंभिक कार्रवाई की है। वीडियो में पुरुषों के निजी अंगों को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद संस्थान ने सेजल पवार को 15 दिनों की अनिवार्य छुट्टी पर भेजने का फैसला लिया। इतना ही नहीं, इस अवधि के दौरान उन्हें मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल परिसर और हॉस्टल कैंपस में प्रवेश करने की अनुमति भी नहीं होगी। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह कदम संस्थान की गरिमा बनाए रखने और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उठाया गया है।

सोशल मीडिया विवाद के बीच परिवार को सौंपा गया छात्रा का जिम्मा

कॉलेज अधिकारियों के मुताबिक, वायरल वीडियो सामने आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सेजल पवार को कुछ समय के लिए उनके परिवार की देखरेख में भेज दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रतिक्रियाओं और सार्वजनिक चर्चा के कारण छात्रा पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए फिलहाल उन्हें कॉलेज से जुड़ी किसी भी शैक्षणिक या अन्य गतिविधि में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल अनुशासनात्मक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि छात्रा की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भी लिया गया है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि इस दौरान स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और आवश्यकतानुसार आगे के कदम उठाए जाएंगे।

पूछताछ के दौरान भावुक हुईं सेजल, काउंसिलिंग लेने की सलाह

सूत्रों के अनुसार, मामले को लेकर हुई प्रारंभिक पूछताछ के दौरान सेजल पवार काफी भावुक नजर आईं। बताया गया कि वह लगातार रो रही थीं और उन्होंने अपने बयान को लेकर खेद भी व्यक्त किया। विवाद बढ़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने उनकी मानसिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। अधिकारियों ने उन्हें पेशेवर काउंसिलिंग लेने की सलाह दी है ताकि किसी प्रकार के मानसिक तनाव, अवसाद या अन्य मनोवैज्ञानिक समस्या से बचा जा सके। संस्थान का मानना है कि सोशल मीडिया पर होने वाली तीखी प्रतिक्रियाएं किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए छात्रा को आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

जांच के लिए बनी 5 सदस्यीय कमेटी, 7 दिन में आएगी रिपोर्ट

विवाद की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए KEM हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज ने पांच सदस्यीय समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस समिति में एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रोफेसर, एक अनुभवी पत्रकार और मेडिकल कॉलेज के तीन फैकल्टी सदस्य शामिल किए जाएंगे। समिति वायरल वीडियो की जांच करेगी, पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करेगी और यह भी आकलन करेगी कि इस विवाद का संस्थान तथा छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ा है। प्रशासन ने पैनल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाएगी तथा रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इस मामले पर पूरे शैक्षणिक समुदाय और सोशल मीडिया की नजर बनी हुई है।

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