पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त भूचाल आया हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पैरों तले जमीन खिसकने वाली है, क्योंकि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दो फाड़ होना अब लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब खुलकर सामने आ चुकी है और इसका केंद्र कोलकाता से शिफ्ट होकर देश की राजधानी दिल्ली बन गया है। तृणमूल कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शुमार और सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने शनिवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बंद कमरे में मुलाकात की, जिसने बंगाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस सीक्रेट मीटिंग के बाद जो खबरें छनकर सामने आ रही हैं, वे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं।
अमित शाह के साथ 30 मिनट की गुप्त बैठक और ‘ऑपरेशन टीएमसी’
शनिवार सुबह जब टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय अचानक दिल्ली पहुंचे, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इतनी बड़ी पटकथा लिख चुके हैं। सुदीप बंदोपाध्याय अपनी साथी सांसद शताब्दी रॉय के साथ सीधे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर पहुंचे। वहाँ लंबी चर्चा हुई और उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए, जो सोमवार को लोकसभा में पेश होने वाले हैं। इसके तुरंत बाद सुदीप बंदोपाध्याय देश के गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट से ज्यादा समय तक बेहद गोपनीय बातचीत हुई। माना जा रहा है कि इस बैठक में टीएमसी के बागी धड़े को केंद्र सरकार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से मिलने वाले समर्थन और उनके भविष्य की रणनीति पर अंतिम मुहर लग चुकी है।
सोमवार को लोकसभा स्पीकर के सामने बड़ी मांग, संसद में बदलेगा नजारा
इस पूरे सियासी ड्रामे का सबसे बड़ा क्लाइमेक्स सोमवार, 15 जून को देखने को मिलेगा। खबरों के मुताबिक, टीएमसी के 20 बागी सांसद एकजुट होकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करने वाले हैं। ये सांसद स्पीकर के सामने किसी समझौते की नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक ‘अलग ब्लॉक’ (Separate Block) के रूप में मान्यता देने की मांग रखेंगे। इस बगावती गुट को एनडीए का पूरा बैकअप मिलने की उम्मीद है। यदि स्पीकर इस मांग को स्वीकार कर लेते हैं, तो संसद के भीतर तृणमूल कांग्रेस का विभाजन आधिकारिक हो जाएगा। इसके बाद लोकसभा में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी और इस बागी गुट के बैठने की व्यवस्था पूरी तरह अलग कर दी जाएगी, जो ममता बनर्जी के राष्ट्रीय राजनीतिक कद पर बहुत बड़ा प्रहार होगा।
इंडिया गठबंधन की बैठक के दिन ही रखी गई थी बगावत की नींव
दरअसल, टीएमसी के भीतर यह आंतरिक कलह कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रही थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही पार्टी के कई सांसद और विधायक नेतृत्व के रवैये से नाराज चल रहे थे। पार्टी पहले ही बंगाल विधानसभा में अपने संसदीय दल पर से नियंत्रण खोती दिख रही थी, और अब यह बगावत लोकसभा तक पहुंच गई है। इस विद्रोह की शुरुआत बीते 1 जून को ही हो गई थी, जब ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दिल्ली में विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक में शामिल होने आए थे। ठीक उसी दिन, पीठ पीछे टीएमसी सांसदों के एक बहुत बड़े वर्ग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर अविश्वास जताते हुए अलग होने का मन बना लिया था, जो अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है।
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