हाल ही में ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रा को लेकर एक बेहद आपत्तिजनक बयान दिया, जिसने देशभर में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मौलाना ने कांवड़ियों की तुलना सीधे तौर पर आतंकवादियों से कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांवड़ यात्रा के नाम पर अधिकतर लोग सिर्फ नशा और उपद्रव फैलाते हैं। मौलाना रशीदी के इस कृत्य ने न केवल शिवभक्तों बल्कि पूरे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने कांवड़ियों को भक्त मानने से इनकार करते हुए उन्हें ‘आतंकी’ करार दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध के सुर तेज हो गए हैं।
संतों में उबाल, सार्वजनिक माफी की मांग
मौलाना के इस बयान के सामने आते ही संत समाज ने कड़ी नाराजगी जताई है। महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने इस बयान को बेहद निंदनीय और शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक है, जिसमें करोड़ों शिवभक्त पूरी आस्था और अनुशासन के साथ भाग लेते हैं। संतों ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी धर्म की पवित्र यात्रा के खिलाफ इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संत समाज ने मांग की है कि मौलाना साजिद रशीदी को अविलंब पूरे देश और हिंदू समाज से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।
कानून से सख्त कार्रवाई की मांग
संतों का कहना है कि इस तरह के बयानों से देश के सामाजिक ताने-बाने और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचता है। महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौलाना के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका तर्क है कि यदि समय रहते ऐसे नफरती बयान देने वालों पर नकेल नहीं कसी गई, तो भविष्य में समाज में अराजकता बढ़ सकती है। संतों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान है, जिसे कानून के दायरे में रहकर सुलझाना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया और बढ़ते तनाव के आसार
मौलाना रशीदी के बयान के बाद से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तीखी बहस छिड़ गई है। हिंदू संगठन मौलाना की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लामबंद हो रहे हैं। दूसरी ओर, इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले को जल्द ही शांतिपूर्ण तरीके से या कानूनी प्रक्रिया के तहत शांत नहीं किया गया, तो यह मामला बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले सकता है। फिलहाल, देशभर के संत और भक्त इस बात पर अडिग हैं कि जब तक मौलाना रशीदी अपने शब्दों को वापस लेकर माफी नहीं मांगते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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