लखनऊ में मंगलवार को महिला सुरक्षा को लेकर लगाए गए कुछ पोस्टरों ने लोगों का ध्यान खींचा। इन पोस्टरों पर QR कोड के साथ महिला अपराधों से जुड़े आंकड़ों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्टरों में आंकड़ों के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटा का हवाला दिया गया है। ये पोस्टर शहर के हजरतगंज, ऐशबाग, लालबाग, हुसैनगंज, चौक और हुसैनाबाद समेत कई इलाकों में नजर आए।
QR कोड स्कैन करने पर क्या दिख रहा है?
पोस्टरों पर दिए QR कोड को स्कैन करने पर लखनऊ और गोरखपुर समेत कुछ शहरों में महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े वर्षवार आंकड़ों तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसका मकसद लोगों को आंकड़ों के जरिए महिला अपराध की स्थिति देखने का मौका देना बताया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन पोस्टरों को लगाने वाले व्यक्ति या संगठन का नाम स्पष्ट नहीं है। इसलिए पोस्टर के पीछे किसका हाथ है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चुनावी माहौल के बीच सामने आया पोस्टर विवाद
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और इसी माहौल में लखनऊ में पोस्टर के जरिए महिला सुरक्षा का मुद्दा सामने आया है। पोस्टर में सरकारी दावों पर सवाल उठाने वाली बातों के साथ आंकड़ों को लोगों के सामने रखने की कोशिश की गई है। इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ सकती हैं, लेकिन फिलहाल पोस्टर लगाने वाले की आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई है। वहीं, लखनऊ पुलिस की ओर से हाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर रात में यात्रा करने वाली महिलाओं से सीधे संवाद की पहल भी की गई है।
एक पोस्टर के बाद दूसरे पोस्टर की चर्चा
इन पोस्टरों को हाल में सामने आए दूसरे राजनीतिक पोस्टरों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। रिपोर्ट में इन्हें एक दिन पहले लगाए गए ‘अखिलेश के माफिया’ पोस्टर के जवाब के तौर पर देखे जाने की बात कही गई है। हालांकि, यह किस संगठन ने लगाया और क्या वास्तव में यह किसी राजनीतिक दल की प्रतिक्रिया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में फिलहाल इतना स्पष्ट है कि लखनऊ की दीवारों पर लगे QR पोस्टरों ने चुनावी माहौल में महिला सुरक्षा और अपराध के आंकड़ों को फिर चर्चा में ला दिया है।
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