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ममता के बाद अब ‘भतीजे’ पर क्यों पिघले TMC सांसद? अल्टीमेटम के बाद अचानक बदला सुर, सियासी गलियारों में मची खलबली!

पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर! टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को लेकर दिया बड़ा बयान। जानिए आखिर क्यों तीखे अल्टीमेटम के बाद अचानक बदल गए कल्याण बनर्जी के सुर और क्या है इसके पीछे की असली वजह।

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की अंदरूनी हलचल लगातार नए मोड़ ले रही है। बीते कुछ दिनों पहले पार्टी के कद्दावर सांसद कल्याण बनर्जी ने जिस आक्रामक अंदाज में ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर कड़े तेवर दिखाए थे, अब उसमें एक हैरान करने वाली नरमी देखने को मिल रही है। कुछ ही समय पहले पार्टी के अस्तित्व को लेकर आर-पार की लड़ाई का अल्टीमेटम देने वाले कल्याण बनर्जी के सुर अब पूरी तरह बदल चुके हैं। हाल ही में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अभिषेक बनर्जी को लेकर एक बेहद भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अभिषेक उनके लिए बेटे जैसे हैं और एक पिता का यह फर्ज होता है कि वह अपने बच्चे की हर गलती को माफ कर दे। अचानक आए इस बड़े हृदय परिवर्तन ने न सिर्फ राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है, बल्कि बंगाल की जनता के बीच भी यह कौतूहल का विषय बन गया है कि आखिर कुछ ही दिनों में ऐसा क्या हुआ जिसने इतने तीखे विवाद को अचानक सुलह के रास्ते पर ला खड़ा किया।

विवाद की असली जड़: जब वकील बदलने पर भड़क उठे थे टीएमसी सांसद

इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत एक कानूनी और राजनीतिक खींचतान के बाद हुई थी। दरअसल, विपक्ष के नेता पद पर दावेदारी के लिए किए गए हस्ताक्षरों में जालसाजी (फ्रॉड) के एक मामले में सीआईडी (CID) लगातार जांच कर रही है। इसी सिलसिले में जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी के आवास पर तलाशी भी ली थी। मूल रूप से पेशे से वकील कल्याण बनर्जी इस बेहद संवेदनशील मामले में अदालत के भीतर अभिषेक बनर्जी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। लेकिन विवाद तब खड़ा हुआ जब अभिषेक बनर्जी ने इस केस में अचानक अपना कानूनी प्रतिनिधि यानी वकील बदल लिया। कल्याण बनर्जी का आरोप था कि अभिषेक ने उनसे बिना किसी चर्चा या मशविरे के दूसरे वकील को नियुक्त कर लिया, जिससे उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्हें जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है। इसी नाराजगी में उन्होंने पार्टी के नेतृत्व को लेकर कड़ा अल्टीमेटम तक दे डाला था, जिससे ऐसा लगने लगा था कि टीएमसी के भीतर एक बड़ी दरार आ चुकी है और पार्टी संकट के दौर से गुजर रही है।

अभिषेक बनर्जी के ‘मैच्योर’ जवाब ने कैसे पलट दी पूरी बाजी?

कल्याण बनर्जी के तीखे हमलों के बाद हर किसी को उम्मीद थी कि अभिषेक बनर्जी की तरफ से भी कोई तीखा पलटवार आएगा, जिससे यह विवाद और ज्यादा भड़क जाएगा। लेकिन अभिषेक ने बेहद समझदारी और परिपक्वता (Maturity) का परिचय देते हुए इस विवाद की हवा ही निकाल दी। उन्होंने कल्याण बनर्जी के बयानों पर किसी भी तरह का गुस्सा जाहिर करने के बजाय बेहद विनम्रता से जवाब दिया। अभिषेक ने स्पष्ट किया कि सांसद कल्याण बनर्जी ने उन्हें उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही नहीं, बल्कि बचपन से देखा है। वह उम्र और तजुर्बे में उनसे काफी बड़े हैं, इसलिए उन्हें अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। अभिषेक ने साफ कहा कि उन्हें अपने वरिष्ठ साथी से कोई शिकायत नहीं है और वे पार्टी के भीतर ही बैठकर हर मुद्दे पर चर्चा कर लेंगे। अभिषेक के इस सम्मानजनक और शांत रुख ने कल्याण बनर्जी के गुस्से को शांत करने में ‘कूलिंग एजेंट’ का काम किया, जिसके बाद सांसद महोदय को भी सार्वजनिक रूप से अपने कदम पीछे खींचने पड़े।

लोकतंत्र के खतरे का हवाला और ‘साझा दुश्मन’ से मिलकर लड़ने का संकल्प

अपने बदले हुए सुरों के बीच कल्याण बनर्जी ने अब राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर एक नया मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से शुरू की गई विभिन्न जांचों और सीआईडी की कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय पश्चिम बंगाल और पूरे देश में लोकतंत्र बेहद गंभीर खतरे में है। कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल में आज जैसी स्थिति है, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई। विपक्ष की आवाज को पूरी तरह से दबाया और कुचला जा रहा है। उन्होंने मौजूदा सत्ता को ‘प्रतिशोधी’ करार देते हुए कहा कि व्यक्तिगत मतभेदों को भुलाकर अब समय एक साथ खड़े होने का है। सांसद ने साफ किया कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, पार्टी के भीतर के मतभेदों को दरकिनार कर उन्हें मिलकर इस तानाशाही और बदले की राजनीति के खिलाफ लड़ना होगा। इस बयान से साफ है कि टीएमसी के भीतर का यह आंतरिक संकट फिलहाल टल गया है और पूरी पार्टी अब बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट होने का संदेश दे रही है।

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