जम्मू-कश्मीर में पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी से ठीक पहले राजनीतिक और सामाजिक माहौल एक बार फिर संवेदनशील हो गया है। इस मौके पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बड़ा बयान देते हुए इस घटना को जम्मू-कश्मीर के लिए गहरा झटका बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला न सिर्फ निर्दोष लोगों की जान लेने वाला था, बल्कि इसने पूरे क्षेत्र की छवि और शांति को भी प्रभावित किया। गौरतलब है कि पिछले साल 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया था।
शहीदों को श्रद्धांजलि और आतंकवाद पर सख्त रुख
अनंतनाग में आयोजित एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए फारूक अब्दुल्ला ने हमले में जान गंवाने वाले सभी लोगों को याद किया। उन्होंने खास तौर पर उन लोगों का जिक्र किया, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई और अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर को शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ाने के लिए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना जरूरी है। उनके बयान को क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील के रूप में देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी रखी राय
इस दौरान फारूक अब्दुल्ला ने वैश्विक राजनीति पर भी अपनी राय दी। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान केवल संवाद के जरिए ही संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लगातार बातचीत से दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा और शांति स्थापित होगी।
उनके अनुसार, “दुनिया को बचाने का एकमात्र रास्ता शांति है, और यह तभी संभव है जब देश आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाएं।” यह बयान अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनके संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
महिला आरक्षण पर स्पष्ट रुख
राजनीतिक मुद्दों पर बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी अपनी पार्टी का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस महिलाओं को अधिकार देने के पक्ष में है और आरक्षण का समर्थन करती है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में जब यह विधेयक संसद में पेश हुआ था, तब इसे व्यापक समर्थन मिला था।
अब्दुल्ला ने कहा कि महिलाओं को राजनीति और समाज में बराबरी का अवसर मिलना चाहिए, तभी देश का समग्र विकास संभव है। उनके इस बयान को महिला सशक्तिकरण के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
