बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़ा एक बड़ा प्रशासनिक विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। कुछ महीने पहले तक जहां सैकड़ों कर्मचारी सस्पेंड होकर अनिश्चितता में थे, वहीं अब उन्हें राहत मिल गई है। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब फरवरी में राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। उस समय राज्य में नीतीश कुमार की सरकार थी और विभाग की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के पास थी। हड़ताल को अनुशासनहीनता मानते हुए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया और एक के बाद एक आदेश जारी कर कुल 224 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया।
अधिकारियों तक पहुंची कार्रवाई, बढ़ा तनाव
मामला यहीं नहीं रुका। मार्च आते-आते हड़ताल और व्यापक हो गई, जिसमें अंचलाधिकारी और अन्य राजस्व अधिकारी भी शामिल हो गए। इससे प्रशासनिक कामकाज लगभग ठप हो गया। सरकार ने इसे गंभीर स्थिति मानते हुए 45 अधिकारियों को भी सस्पेंड कर दिया। इस कार्रवाई से विभाग के अंदर तनाव और बढ़ गया। जमीन से जुड़े जरूरी काम जैसे दाखिल-खारिज, नामांतरण और रिकॉर्ड अपडेट जैसे कार्य प्रभावित होने लगे। आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनकी फाइलें लंबित होती चली गईं। यह विवाद धीरे-धीरे प्रशासनिक संकट का रूप लेने लगा।
नेतृत्व परिवर्तन के बाद बदला फैसला
इसी बीच बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद राज्य की कमान सम्राट चौधरी को सौंपी गई। नए मुख्यमंत्री ने पद संभालते ही इस पूरे मामले की समीक्षा की। इसके बाद एक अहम निर्णय लेते हुए सभी निलंबित कर्मचारियों और अधिकारियों की बहाली का आदेश दे दिया गया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच जिन कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था, उनकी बहाली प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। इस फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
कामकाज पटरी पर लौटने की उम्मीद
करीब ढाई महीने तक चली हड़ताल और सस्पेंशन की वजह से विभाग के कई अहम काम प्रभावित हुए थे। आम जनता को जमीन से जुड़े मामलों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अब जब निलंबन वापस ले लिया गया है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि विभाग का कामकाज जल्द ही सामान्य हो जाएगा। यह फैसला न सिर्फ कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को भी फिर से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह देखना अहम होगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।
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