गुजरात के अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया फ्लाइट AI 171 क्रैश ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी थी। इसी हादसे में 28 वर्षीय मोहम्मद मियां सेथवाला ने अपनी पत्नी सादिका और दो साल की मासूम बेटी फातिमा को खो दिया था। यह दर्दनाक घटना 12 जून 2025 को हुई थी, जब विमान टेकऑफ के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उसमें सवार 241 लोगों की मौत हो गई थी। इस त्रासदी ने सेथवाला की दुनिया उजाड़ दी, और वह अब तक इस गहरे सदमे से पूरी तरह बाहर भी नहीं निकल पाए हैं।
मानवीय अपील भी नहीं आई काम
इस दर्द के बीच अब उनके सामने एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है। ब्रिटेन में रह रहे सेथवाला ने वहां के गृहमंत्रालय से मानवीय आधार पर रहने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि वे मानसिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में हैं और उन्हें कुछ समय की जरूरत है। लेकिन 9 अप्रैल को यूके होम ऑफिस ने उनकी इस अपील को खारिज कर दिया। इस फैसले ने सेथवाला को एक और बड़ा झटका दिया है, क्योंकि वे पहले ही अपने परिवार को खोने के गम से जूझ रहे हैं।
अब देश छोड़ने का अल्टीमेटम
यूके प्रशासन ने सेथवाला को 22 अप्रैल तक इमिग्रेशन बेल पर रखा है, जिसके बाद उन्हें लंदन छोड़कर भारत लौटने का आदेश दिया गया है। इस फैसले ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। एक तरफ वे अपने परिवार की यादों से टूटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ अब उन्हें अपना ठिकाना भी छोड़ना पड़ेगा। उनके करीबी लोगों का कहना है कि यह फैसला उनके लिए बेहद कठोर है, क्योंकि ऐसे समय में उन्हें सहारे और स्थिरता की जरूरत है, न कि नए झटकों की।
सवालों के घेरे में फैसला
इस पूरे मामले ने मानवीय संवेदनाओं और सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसे व्यक्ति को, जिसने हाल ही में इतना बड़ा व्यक्तिगत नुकसान झेला हो, इस तरह का फैसला सुनाना उचित है? सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर लोग इस निर्णय की आलोचना कर रहे हैं और इसे अमानवीय बता रहे हैं। सेथवाला के लिए यह सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और मानसिक संतुलन को बचाने की जंग बन चुकी है।
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