देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक को लेकर पहले से ही माहौल गर्म है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं। इसी बीच उत्तराखंड से सामने आई पेपर लीक घटना ने छात्रों की चिंता और बढ़ा दी है। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) ने इंजीनियरिंग के दो विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। विश्वविद्यालय को जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले कि परीक्षा से पहले छात्रों तक प्रश्नों से मिलते-जुलते सवाल पहुंचाए गए थे। मामला सामने आते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों परीक्षाओं को निरस्त कर दिया और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी। इस घटना के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं।
जांच में शिक्षक पर लगे गंभीर आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से जुड़े एक शिक्षक, जिन्हें प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी, पर परीक्षा से पहले छात्रों को सवाल भेजने का आरोप है। बताया गया कि संबंधित शिक्षक ने एक कॉलेज के व्हाट्सएप ग्रुप में ऐसे प्रश्न साझा किए, जिनका काफी हिस्सा वास्तविक परीक्षा से मेल खाता था। छात्रों की शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच में यह भी पता चला कि एक अन्य विषय के प्रश्नपत्र को लेकर भी संदेह पैदा हुआ, जिसके बाद उसे भी रद्द करने का फैसला लिया गया। फिलहाल आरोपी शिक्षक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
विश्वविद्यालय ने दिखाई सख्ती
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति तृप्ता ठाकुर ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आरोपी शिक्षक को विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा से जुड़े कार्य में अगले सात वर्षों तक शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही संबंधित कॉलेज से भी सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। कुलपति का कहना है कि शिक्षकों पर छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी होती है और यदि कोई इस भरोसे को तोड़ता है तो उसके खिलाफ कठोर कदम उठाना जरूरी है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि केवल आंतरिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
अगस्त में दोबारा होगी परीक्षा
विश्वविद्यालय ने बताया कि जिन दो विषयों की परीक्षाएं रद्द की गई हैं, उन्हें अगस्त महीने में दोबारा आयोजित किया जाएगा। नई परीक्षा तिथि जल्द जारी की जाएगी ताकि छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक सत्र पर कम से कम असर पड़े। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए और कौन से कदम उठाने होंगे। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से छात्रों का भरोसा प्रभावित हो रहा है। ऐसे में छात्र संगठनों का कहना है कि केवल दोषियों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और विश्वविद्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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