केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के बोनस से जुड़े नियमों को लेकर अहम जानकारी जारी की है। नए लेबर कोड के तहत ₹21,000 तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करने पर बोनस का लाभ मिल सकता है। खास बात यह है कि पात्र कर्मचारी को बोनस देना नियोक्ता की जिम्मेदारी होगी। ऐसे में अगर आपकी सैलरी 21 हजार रुपये या उससे कम है, तो यह नियम आपके लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
बोनस की रकम कितनी होगी? जानिए पूरा हिसाब
नए प्रावधानों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को सालाना बोनस कम से कम 8.33 फीसदी और अधिकतम 20 फीसदी की दर से मिल सकता है। बोनस की गणना के लिए हर महीने ₹7,000 या संबंधित काम के लिए लागू न्यूनतम मजदूरी, इनमें से जो रकम ज्यादा होगी, उसे आधार माना जाएगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की मासिक आय ₹15,000 है और उसके काम के लिए न्यूनतम मजदूरी ₹10,000 तय है, तो बोनस की गणना ₹10,000 के आधार पर की जाएगी। वहीं, यदि न्यूनतम मजदूरी ₹12,000 है तो इसी रकम को बोनस कैलकुलेशन का आधार माना जाएगा।
₹12 हजार की सैलरी पर कितना मिलेगा बोनस?
बोनस की गणना समझने के लिए मान लीजिए किसी कर्मचारी की गणना योग्य न्यूनतम मजदूरी ₹12,000 है। ऐसे में सालाना न्यूनतम बोनस का हिसाब ₹12,000 × 8.33% × 12 के आधार पर किया जाएगा। इस हिसाब से रकम करीब ₹11,995 सालाना बैठती है। यानी पात्र कर्मचारी को न्यूनतम बोनस के तौर पर लगभग 12 हजार रुपये तक मिल सकते हैं। हालांकि वास्तविक बोनस कर्मचारी की पात्रता, वेतन और लागू नियमों के आधार पर तय होगा। बोनस की अधिकतम सीमा 20 फीसदी तक हो सकती है।
बोनस देने की भी तय है समय सीमा
‘कोड ऑन वेजेज, 2019’ के तहत बोनस के भुगतान की समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। नियम के मुताबिक, अकाउंटिंग ईयर खत्म होने के आठ महीने के भीतर पात्र कर्मचारी के बैंक खाते में बोनस की रकम जमा की जानी चाहिए। हालांकि पर्याप्त कारण होने पर समय बढ़ाने के लिए आवेदन किया जा सकता है और कुछ परिस्थितियों में यह अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है। इसलिए कर्मचारियों को अपनी वेतन संरचना, न्यूनतम मजदूरी और कंपनी में बोनस की पात्रता जरूर जांचनी चाहिए।
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