बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने पूरे शाहाबाद क्षेत्र में बहस छेड़ दी है। 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की मौत के बाद से इलाके में लगातार सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ पुलिस इस कार्रवाई को कानून के दायरे में हुई मुठभेड़ बता रही है, तो दूसरी ओर परिजन और ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इस बीच, भरत तिवारी को जानने वाले लोग उनके जीवन से जुड़े ऐसे पहलुओं को सामने ला रहे हैं, जिनकी वजह से वह युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे।
साधारण परिवार से निकलकर युवाओं की आवाज बने
ग्रामीणों के अनुसार, भरत तिवारी एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आते थे। उनके पिता बिहार पुलिस में चालक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। परिवार का राजनीति या किसी बड़े प्रभावशाली वर्ग से कोई संबंध नहीं रहा है। बचपन से ही भरत की रुचि पढ़ाई में थी और परिवार चाहता था कि वह अच्छी शिक्षा हासिल कर सरकारी नौकरी करे। उन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की और कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी की। हालांकि, सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर काम करना शुरू कर दिया। गांव के लोगों का कहना है कि भरत बेरोजगारी, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाओं और युवाओं की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाते थे।
गांव के मुद्दों को उठाने से मिली अलग पहचान
स्थानीय लोगों के मुताबिक, भरत तिवारी ने अपने गांव और आसपास के इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को प्रमुख मुद्दा बनाया। वह सोशल मीडिया और स्थानीय बैठकों के जरिए युवाओं को जागरूक करने की कोशिश करते थे। कई बार उन्होंने खराब सड़कों, बिजली आपूर्ति, सरकारी योजनाओं के लाभ और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रशासन तक पहुंचाया। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि भरत हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे और जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़े दिखाई देते थे। यही वजह है कि उनकी मौत के बाद बड़ी संख्या में लोग परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं और उन्हें गांव का “मसीहा” बता रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जांच की मांग के बीच जवाब का इंतजार
एनकाउंटर के बाद बेलौटी गांव में लगातार लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेता परिवार से मुलाकात कर रहे हैं। परिजन और ग्रामीण पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई की है। फिलहाल, पूरे मामले पर लोगों की नजर जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है। भरत तिवारी की लोकप्रियता और उनके सामाजिक कामों को लेकर हो रही चर्चा ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
