अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को इस सप्ताहांत तक ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की तैयारी करने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि इस संभावित अभियान का उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना और उसे अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर करना है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभियान के सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन इस खबर के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य कार्रवाई होती है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।
ऊर्जा ठिकानों पर हमले की चर्चा, मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे, जैसे बिजली संयंत्र और पेट्रोलियम रिफाइनरियों को संभावित निशाना बनाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक सैन्य योजना सार्वजनिक नहीं की गई है। इस बीच कई मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि आम नागरिकों के उपयोग वाले ढांचों को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है। इन खबरों के बाद वैश्विक बाजार में भी हलचल देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ा तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
व्हाइट हाउस का सख्त रुख, कूटनीतिक समाधान पर बनी अनिश्चितता
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका का मानना है कि ईरान को अपने कदमों की कीमत चुकानी होगी और जब तक वह अमेरिका की अपेक्षाओं के अनुरूप बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक दबाव की नीति जारी रह सकती है। इससे पहले भी राष्ट्रपति ट्रंप कई बार ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की चेतावनी दे चुके हैं। दूसरी ओर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन मौजूदा हालात में सैन्य और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।
दुनिया की नजर मध्य पूर्व पर, तेल बाजार और व्यापार पर पड़ सकता है असर
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था, परिवहन और महंगाई पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देशों के बीच हालात बातचीत से संभलते हैं या सैन्य टकराव की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
