बिहार में नई सरकार के गठन के बाद सरकारी आवासों की अदला-बदली तेजी से शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को भी वह आवास खाली करने का आदेश मिला है जिसमें वे पिछले कार्यकाल से रह रहे थे। तेज प्रताप इस समय पटना के 26 M स्ट्रैंड रोड वाले सरकारी बंगले में रह रहे हैं, जो उन्हें हसनपुर से विधायक रहते हुए मिला था। लेकिन इस बार उन्होंने सीट बदलकर महुआ से चुनाव लड़ने का जोखिम उठाया, जहां उन्हें उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। एनडीए के मजबूत प्रदर्शन के बीच तेज प्रताप को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद अब बतौर विधायक उन्हें दिया गया सरकारी आवास स्वतः ही खत्म हो गया।
भवन निर्माण विभाग की ओर से जारी नए आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि 26 M स्ट्रैंड रोड स्थित बंगला अब नव-नियुक्त मंत्री लखिन्दर कुमार रौशन को आवंटित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि तेज प्रताप को निकट भविष्य में यह आवास पूरी तरह खाली करना होगा। सरकारी बंगलों के आवंटन को लेकर विभाग सख्त है और नई सरकार बनने के बाद जो भी प्रतिनिधि अपने पद पर नहीं हैं, उन्हें नियमों के अनुसार घर खाली करने का निर्देश दिया जा रहा है।
तेज प्रताप के मामले में यह कदम पूरी तरह प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय जरूर बना हुआ है। तेज प्रताप, जो अक्सर अपने अंदाज और बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं, अब बंगले के बदलाव के कारण एक बार फिर समाचारों का हिस्सा बन गए हैं। हालांकि यह भी तय है कि सरकारी आवास बदलने से उनकी राजनीतिक भूमिका पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन यह चुनावी हार के बाद उनकी परिस्थितियों में आया एक बड़ा बदलाव जरूर माना जा रहा है।
राबड़ी देवी को भी 10 सर्कुलर रोड वाला सरकारी बंगला छोड़ना पड़ेगा
तेज प्रताप यादव के अलावा उनकी मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को भी अब अपना दशकों पुराना सरकारी आवास छोड़ना पड़ेगा। राबड़ी देवी वर्ष 2005 से 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रह रही थीं, जो बिहार के सबसे चर्चित राजनीतिक पतों में से एक माना जाता है। यह बंगला पूर्व मुख्यमंत्री कोटे से उन्हें मिला हुआ था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। राबड़ी देवी इस समय बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रही हैं और इसी कारण भवन निर्माण विभाग ने उनके लिए नया आवास निश्चित किया है।
सरकारी आदेश के मुताबिक राबड़ी देवी को अब हार्डिंग रोड स्थित केंद्रीय पूल आवास में स्थानांतरित किया गया है। उन्हें यहां मकान नंबर 39 आवंटित हुआ है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित सुरक्षा और सरकारी नीतियों के अनुसार नए आवास का चयन किया गया है। इस इलाके को पटना का अत्यंत संवेदनशील और सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है, जहां पहले से ही कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के बंगले स्थित हैं।
10 सर्कुलर रोड लंबे समय तक आरजेडी की राजनीति का केंद्र रहा है। यहां से कई बड़े राजनीतिक फैसले लिए गए और यही घर लालू प्रसाद यादव के परिवार की राजनीतिक गतिविधियों का हब माना जाता है। अब इस बंगले को छोड़ना न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि एक तरह से यादव परिवार के लिए भावनात्मक पल भी। हालांकि, यह स्थानांतरण स्थायी नहीं बल्कि पद के आधार पर किया जाने वाला नियमित बदलाव है। राबड़ी देवी को मिला नया घर भी उसी श्रेणी का है जिसमें सुरक्षा, बैठक व्यवस्था और सरकारी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध हैं।
नई सरकार ने मंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों को भी नए सरकारी बंगले बांटे
नए प्रशासन के कामकाज को सुचारू रूप से शुरू करने के लिए भवन निर्माण विभाग ने मंत्रियों, उप मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी उनके विभाग और सुरक्षा आवश्यकताओं के हिसाब से नए सरकारी आवास आवंटित किए हैं। विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार कई मंत्री हार्डिंग रोड, स्ट्रैंड रोड, डाकबंगला रोड, देशरत्न मार्ग और सचिवालय इलाके में शिफ्ट किए जाएंगे। इन क्षेत्रों को उच्च सुरक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री सम्राट चौधरी को 5 देशरत्न मार्ग स्थित उच्च श्रेणी का आवास दिया गया है, जो मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ पदों के नजदीक होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं, उपमुख्यमंत्री एवं खनन मंत्री विजय कुमार सिन्हा को तीन स्ट्रैंड रोड स्थित सरकारी बंगला आवंटित किया गया है। इन सभी आवासों में सुरक्षा, पार्किंग, बैठक कक्ष और अन्य सुविधाएं सरकार की गाइडलाइन के अनुसार उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकारी आवास आवंटन का यह चरण हर नई सरकार के गठन के बाद होता है, लेकिन इस बार बंगले बदलने की प्रक्रिया खासतौर पर चर्चा में है, क्योंकि कई बड़े नामों, जैसे राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव—के आवास भी इसमें शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह सब पूरी तरह से नियमों पर आधारित है और प्रत्येक प्रतिनिधि को उनके वर्तमान पद और जिम्मेदारियों के हिसाब से ही घर दिया जा रहा है।
सरकारी आवासों का यह नया नक्शा आने वाले समय में बिहार की राजनीतिक हलचल का केंद्र हो सकता है, क्योंकि इन बदलावों से राजनीतिक संकेत भी मिलते हैं और प्रशासनिक दिशा भी तय होती है।
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