झारखंड के हजारीबाग जिला के कटकमदाग प्रखंड के गोदखर गांव के अंबेडकर नगर में एक चौंकाने वाली घटना हुई। पीएम आवास के लिए जेसीबी से मिट्टी खोदते समय मिट्टी के नीचे से भगवान शिव और माता पार्वती की प्राचीन मूर्ति प्रकट हुई। इस मूर्ति में उमा-महेश्वर की जोड़ी दिखाई दे रही है, जिसे देखकर आसपास के लोग हैरान रह गए। जैसे ही यह खबर फैली, ग्रामीणों में उत्साह और जिज्ञासा का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह मूर्ति गांव के लिए एक ऐतिहासिक और धार्मिक तोहफा है।
विशेषज्ञों ने बताया पाल वंश काल की दुर्लभ प्रतिमा
इस प्राचीन मूर्ति की जानकारी मिलते ही प्रसिद्ध पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. नीरज मिश्रा (रांची यूनिट) को सूचित किया गया। डॉ. मिश्रा का कहना है कि यह मूर्ति पाल वंश काल (9वीं-10वीं शताब्दी) की है और बहुत ही दुर्लभ है। मूर्ति के डिज़ाइन और आकार से पता चलता है कि इसे बड़े ही बारीकी और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर बनाया गया था। विशेषज्ञों ने इस मूर्ति को संरक्षित करने और विस्तृत अध्ययन के लिए पुरातत्व विभाग के सामने रखने की सलाह दी है।
गांव में शुरू हुई पूजा-पाठ और उमड़ी भीड़
मूर्ति मिलने के बाद से गोदखर गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया है। धनवा देवी ने इसे अपने घर में सुरक्षित रखा है और पूजा-पाठ शुरू कर दिया है। गांव के लोग रोज दर्शन के लिए आने लगे हैं और मंदिर बनवाने की मांग जोर पकड़ रही है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्राचीन मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई जाए ताकि इसे सम्मान और धार्मिक महत्व दिया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की खोज उनके लिए गर्व की बात है और यह गांव की सांस्कृतिक पहचान को भी बढ़ाएगी।
हजारीबाग का पुरातात्विक महत्व और सरकार की भूमिका
हजारीबाग जिला पहले भी छड़वा डैम और बहुरनपुर क्षेत्र में प्राचीन अवशेषों के लिए जाना जाता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से बेहद समृद्ध है और यहां कई अनमोल धरोहरें छिपी हुई हैं। अब सवाल यह उठता है कि सरकार इन धरोहरों के संरक्षण और उनकी पहचान को विश्व पटल पर कैसे लाएगी। पुरातत्व विशेषज्ञ और स्थानीय लोग चाहते हैं कि इस तरह की खोजों को सुरक्षित रखा जाए और अध्ययन के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी दिया जाए।
Read more-बोंडी बीच अटैक का असली हीरो! बंदूकधारी से भिड़े अहमद अल अहमद, अपनी जान जोखिम में छीनी बंदूक फिर…
