दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित और दर्दनाक मामलों में से एक, आईबी (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला आने के बाद सियासत गरमा गई है। अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिसके बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद तीखी और बेबाक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस फैसले को न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है, साथ ही उन सवालों को भी उठाया है जो उस समय की राजनीतिक व्यवस्था और साजिशों की ओर इशारा करते हैं।
न्याय की जीत, लेकिन जनता को थी और भी बड़ी उम्मीद
सांसद मनोज तिवारी ने खुलकर कहा कि जिस तरह से उनके संसदीय क्षेत्र में साल 2020 के दौरान ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने खूनी खेल खेला, उसे देखकर रूह कांप जाती है। उन्होंने कहा कि मास्टरमाइंड को उम्रकैद मिलना इस बात का सबूत है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन लोगों ने अपनी आंखों से उस तांडव को झेला है और पीड़ित परिवार ने जो दर्द सहा है, उन्हें अदालत से और भी ज्यादा कड़ी यानी मौत की सजा की उम्मीद थी। इसके बावजूद, इस फैसले से लोगों के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास काफी हद तक मजबूत हुआ है।
सुनियोजित था अपराध और बर्बरता की हदें पार
अंकित शर्मा के परिवार द्वारा लगातार मृत्युदंड की मांग किए जाने पर समर्थन जताते हुए मनोज तिवारी ने उस खौफनाक रात को याद किया। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य या अचानक भड़का हुआ दंगा नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत 53 बेकसूर लोगों की जान लेने का षड्यंत्र था। छतों पर पहले से पेट्रोल बम, पत्थर और हथियार जमा करके रखना इस बात का पुख्ता सुबूत था कि ताहिर हुसैन और उसके गुर्गे किस खतरनाक मंशा के साथ मैदान में उतरे थे। उन्होंने कहा कि जब वे खुद पीड़ित परिवार से सांत्वना देने पहुंचे थे, तो वहां का माहौल देखकर उनके पास सांत्वना देने के भी शब्द नहीं बचे थे।
आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर बड़ा राजनीतिक हमला
इस पूरी घटना की आंच आम आदमी पार्टी (AAP) तक पहुंचाते हुए मनोज तिवारी ने पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी पार्टी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली की जनता के सामने आकर हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए। उनके मुताबिक, ताहिर हुसैन को पार्षद का टिकट देकर उसे राजनीतिक ताकत और शह देने का काम आम आदमी पार्टी ने ही किया था, जिसका खामियाजा एक निर्दोष आईबी अधिकारी और शहर के दर्जनों बेगुनाहों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। दूसरी ओर, सजा के बाद ताहिर हुसैन का सिर्फ यह कहना कि उसे हाईकोर्ट से इंसाफ की उम्मीद है, कानूनी प्रक्रिया के तहत उसका अपना रुख है।
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