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भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अचानक हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन! आखिर क्या सुरक्षित रखने का दिया आदेश?

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा। कोर्ट ने CCTV फुटेज, CDR, बॉडी कैमरा फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत सभी अहम साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। जानिए पूरी खबर।

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बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पटना हाईकोर्ट ने पहली सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए बिहार सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि सरकार तय समय सीमा के अंदर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखे। इस आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए जांच से जुड़े सभी अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं। अदालत का मानना है कि किसी भी संवेदनशील मामले में न्याय तभी संभव है, जब सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार सरकार अदालत में क्या जवाब पेश करती है और जांच की दिशा आगे कैसे तय होती है।

कोर्ट ने CCTV से लेकर बॉडी कैमरा फुटेज तक सुरक्षित रखने के दिए निर्देश

सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बिना किसी बदलाव के सुरक्षित रखे जाएं। अदालत ने विशेष रूप से सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), स्टेशन डायरी, वायरलेस लॉग, पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरा फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों को संरक्षित रखने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना है कि ये सभी साक्ष्य मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि किसी भी प्रकार के रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ होती है तो इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि अदालत ने शुरुआती चरण में ही सबूतों को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया है। इस आदेश को मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता वर्षा सिंह ने बताया कोर्ट के आदेश का महत्व

भरत तिवारी की ओर से पैरवी कर रहीं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता वर्षा सिंह ने भी अदालत के आदेश की जानकारी एक वीडियो संदेश के माध्यम से साझा की। उन्होंने बताया कि यह मामले की पहली सुनवाई थी और अदालत ने शुरुआत से ही इसे गंभीरता से लिया। उनके अनुसार, कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि किसी भी महत्वपूर्ण साक्ष्य को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए और सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। वर्षा सिंह ने कहा कि अदालत का यह आदेश निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब बिहार सरकार को निर्धारित समय के भीतर अपना विस्तृत जवाब अदालत में दाखिल करना होगा, जिसके आधार पर आगे की सुनवाई होगी।

28 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त 2026 की तारीख तय की है। तब तक बिहार सरकार को अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद कोर्ट सरकार के पक्ष, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की स्थिति की समीक्षा करेगा। भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहले से ही लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, इसलिए अदालत की अगली सुनवाई को लेकर भी काफी उत्सुकता बनी हुई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि सभी साक्ष्य सुरक्षित रहते हैं और जांच पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है तो मामले के तथ्यों को स्पष्ट करने में आसानी होगी। अब 28 अगस्त की सुनवाई इस पूरे मामले का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी, जहां अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच को लेकर नया रुख तय कर सकती है।

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