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कब्रों पर JCB चली, कफन बाहर आए… और मुआवजा सिर्फ 100 रुपये? मथुरा में क्यों भड़का बवाल

मथुरा में कब्रिस्तान की 9 कब्रें जेसीबी से टूटने के बाद विवाद बढ़ गया। परिजनों ने 100 रुपये मुआवजे को अपमान बताया। जानिए पूरा मामला।

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Mathura News: उत्तर प्रदेश के मथुरा में नगर निगम की कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला मनोहरपुरा इलाके के करीब 117 साल पुराने एक कब्रिस्तान से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर नगर निगम की जेसीबी मशीन घुस गई और कई कब्रें क्षतिग्रस्त हो गईं। जानकारी के मुताबिक, इस घटना में करीब 9 कब्रें टूट गईं। घटना के बाद स्थानीय मुस्लिम कब्रिस्तान समिति ने इसे गंभीर लापरवाही बताया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। समिति का कहना है कि इस कार्रवाई से मृतकों की गरिमा को ठेस पहुंची है।

कफन बाहर आए, कंकाल दिखने लगे—परिजनों के आरोप

कब्रिस्तान समिति और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि जब कब्रें टूटीं तो अंदर से कफन बाहर आ गए और कुछ जगहों पर कंकाल तक दिखाई देने लगे। यह घटना 26 अप्रैल की रात की बताई जा रही है, जब नगर निगम से जुड़ी एक मशीन पानी की टंकी के पास काम कर रही थी और कथित तौर पर कब्रिस्तान क्षेत्र में घुस गई। समिति के सचिव शाकिर हुसैन ने कहा कि प्रशासन ने इस नुकसान को बेहद हल्के में लिया है। उनके अनुसार, कब्रों के साथ-साथ पेड़ और कंक्रीट के पिलरों को भी नुकसान हुआ है, लेकिन हर चीज का मूल्यांकन सिर्फ 100 रुपये तय किया गया है।

100 रुपये मुआवजे पर क्यों भड़का विवाद?

मुआवजे की राशि को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी देखी जा रही है। कब्रिस्तान समिति ने इसे मृतकों का अपमान बताया है। उनका कहना है कि जिस तरह से कब्रों को नुकसान पहुंचा और दफन स्थल प्रभावित हुआ, उसके मुकाबले 100 रुपये का मुआवजा बेहद असंवेदनशील है। समिति ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी दर्ज कराई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं और सम्मान से भी जुड़ा है।

नगर निगम ने दी सफाई

वहीं नगर निगम की ओर से इस पूरे मामले पर अलग ही पक्ष रखा गया है। अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह ने कहा कि मुआवजे की गणना संबंधित विभाग की रिपोर्ट और मौजूदा नियमों के आधार पर की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निगम किसी भी धार्मिक या दफन स्थल को नुकसान पहुंचाने का समर्थन नहीं करता। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला तकनीकी प्रक्रिया के तहत मूल्यांकन से जुड़ा है। फिलहाल पूरे मामले की जांच और चर्चा जारी है, जबकि स्थानीय स्तर पर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।

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