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RTI में हुआ बड़ा दावा! बदरी-केदार मंदिर समिति पर करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे के दुरुपयोग का आरोप, मचा हड़कंप

RTI के आधार पर बदरी-केदार मंदिर समिति पर TA-DA भुगतान में अनियमितता और श्रद्धालुओं के चढ़ावे के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और किन बिंदुओं पर उठे सवाल।

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उत्तराखंड की बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों में आ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के आधार पर समिति के कुछ सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कुछ पदाधिकारियों ने यात्रा भत्ता (TA) और दैनिक भत्ता (DA) के नाम पर नियमों के विपरीत लाखों रुपये का भुगतान लिया। नेगी का कहना है कि यह रकम श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे से जुड़े मंदिर कोष से दी गई, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।

नियम क्या कहते हैं और आरोप क्या हैं?

विकेश सिंह नेगी के अनुसार, मंदिर समिति अधिनियम की धारा 26(च) में साफ लिखा है कि समिति के सदस्य केवल आधिकारिक बैठकों या समिति के कार्यों में शामिल होने पर ही यात्रा और दैनिक भत्ता पाने के हकदार हैं। RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, मौजूदा समिति का गठन पिछले वर्ष जून में हुआ था और इस दौरान बोर्ड की केवल एक बैठक आयोजित हुई। इसके बावजूद कुछ सदस्यों ने कई बार यात्रा भत्ता और अन्य भुगतान प्राप्त किए। आरोप है कि कई धार्मिक कार्यक्रमों और व्यक्तिगत दौरों को भी सरकारी कार्य दिखाकर भुगतान लिया गया। नेगी का कहना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह नियमों का उल्लंघन और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।

हेलीकॉप्टर यात्रा और अन्य भुगतानों पर भी सवाल

आरोपों में यह भी कहा गया है कि कुछ सदस्यों की केदारनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर का खर्च भी मंदिर कोष से उठाया गया। इसके अलावा अलग-अलग धार्मिक आयोजनों और धाम यात्राओं में शामिल होने के नाम पर भी भुगतान लेने का दावा किया गया है। RTI के दस्तावेजों के हवाले से यह भी आरोप लगाया गया कि एक मामले में भुगतान से पहले लेखा विभाग ने आपत्ति दर्ज की थी, लेकिन इसके बावजूद राशि जारी कर दी गई। नेगी का कहना है कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भुगतान नियमों के अनुसार हुआ या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर समिति के पदाधिकारी लोकसेवक की श्रेणी में आते हैं, इसलिए यदि अनियमितता साबित होती है तो भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

समिति का पक्ष आना अभी बाकी

यह पहला मौका नहीं है जब बदरी-केदार मंदिर समिति पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी मंदिर कोष के खर्च, वीआईपी व्यवस्थाओं और अन्य वित्तीय मामलों को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। इस बार भी शिकायतकर्ता ने कई पुराने मामलों का जिक्र करते हुए जांच की मांग दोहराई है। हालांकि, इन आरोपों पर समिति के अध्यक्ष या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कराता है या नहीं और यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्ष क्या सामने आते हैं।

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