UP News: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में चर्चित आरव हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की हत्या के दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। यह मामला 30 मई 2026 का है, जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। मासूम बच्चे की बेरहमी से हत्या के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था। खास बात यह रही कि घटना के बाद पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की और अदालत ने भी प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करते हुए मात्र 40 दिनों के भीतर फैसला सुना दिया। इस फैसले को त्वरित न्याय का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
पुलिस जांच और गवाहों ने मजबूत किया मामला
घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जांच टीम ने केवल छह दिनों के भीतर चार्जशीट तैयार कर अदालत में दाखिल कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों को पेश किया, जिन्होंने मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य अदालत के सामने रखे। वहीं बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश किया गया। अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और जांच रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन किया। इसके बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त और मजबूत सबूत मौजूद हैं। इसी आधार पर उसे दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई।
एकतरफा सोच ने मासूम की जिंदगी छीन ली
जांच में सामने आया कि आरव की मां रति देवी अपने वैवाहिक विवाद के कारण कुछ महीनों से मायके में रह रही थीं। इसी दौरान आरोपी जितेंद्र पाठक उनके संपर्क में आया और शादी का प्रस्ताव रखा। हालांकि महिला ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। पुलिस के अनुसार, इसी बात से नाराज होकर आरोपी ने बदला लेने की साजिश रची। घटना वाले दिन वह बच्चे को बहाने से अपने साथ ले गया। आरोप है कि इसके बाद उसने मासूम के साथ बेहद क्रूर व्यवहार किया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया था और पूरे इलाके में आरोपी के खिलाफ गुस्सा देखने को मिला था।
अदालत के फैसले को माना जा रहा न्याय की बड़ी मिसाल
शुक्रवार को सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। फैसला सुनने के बाद आरोपी भावुक हो गया और अदालत में ही रोने लगा। वहीं पीड़ित परिवार ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिला है। सरकारी पक्ष के वकीलों ने भी कहा कि मजबूत जांच और ठोस साक्ष्यों के कारण अदालत तक सही तथ्य पहुंच सके। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में सुनाया गया यह फैसला गंभीर अपराधों में त्वरित न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। अब यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
