अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान को लेकर उठे विवाद ने अब देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है। मंदिर में चढ़ावे के दुरुपयोग और चोरी के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करने जा रहा है। इस मामले ने धार्मिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विषय में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। इसी कारण अदालत से मामले की स्वतंत्र जांच और दान व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा कराने की मांग की गई है। अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस संवेदनशील मामले पर महत्वपूर्ण टिप्पणी कर सकती है।
CBI जांच और विशेष SIT बनाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कई अहम मांगें रखी गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की भी अपील की गई है, ताकि पूरे मामले की गहराई से पड़ताल हो सके। याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि मंदिर में आने वाले दान और उसके उपयोग की प्रक्रिया का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि यदि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से होगी तो लोगों का भरोसा और मजबूत होगा। इसी वजह से अदालत से इस दिशा में आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
फोरेंसिक ऑडिट और दान की जानकारी सार्वजनिक करने की अपील
मामले में सिर्फ जांच की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि मंदिर के वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया है। याचिकाओं में सुझाव दिया गया है कि किसी स्वतंत्र संस्था द्वारा ट्रस्ट का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए, जिससे दान की राशि और उसके उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा हो सके। इसके अलावा मंदिर को मिलने वाले दान की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से सार्वजनिक करने की मांग भी रखी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान देते हैं, तो उन्हें यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उस राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को लेकर भी अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन याचिकाओं पर होगी सुनवाई
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ करेगी। उनके साथ जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल रहेंगे। अदालत के सामने कुल तीन अलग-अलग याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। इन याचिकाओं में दान प्रबंधन की निगरानी, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की समीक्षा और श्रद्धालुओं के हितों की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह केवल आर्थिक मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है। ऐसे में अदालत का फैसला भविष्य में धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। 13 जुलाई की सुनवाई को लेकर देशभर के श्रद्धालु और कानूनी विशेषज्ञ विशेष रुचि के साथ इंतजार कर रहे हैं।
