वाराणसी के राजातालाब तहसील परिसर में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब 65 वर्षीय वशिष्ठ नारायण ने खुद को आग के हवाले कर लिया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वशिष्ठ नारायण लंबे समय से सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन के निशाने पर थे। इस आत्मदाह की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और लोग तहसील परिसर में जमा हो गए।
सरकारी जमीन और बेदखली का आदेश
प्रशासन का कहना है कि मृतक ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ था। इसी कारण 17 मई को धारा 67 के तहत बेदखली का आदेश पारित किया गया था। अधिकारियों का दावा है कि वशिष्ठ नारायण को कई बार नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन उन्होंने कब्जा खाली नहीं किया। वहीं, परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना सुनवाई किए जबरन कार्रवाई की, जिससे वशिष्ठ नारायण मानसिक दबाव में आ गए थे। इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
नाराजगी और बढ़ता आक्रोश
इलाके के लोगों में इस घटना को लेकर गुस्सा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी विवाद को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया से सुलझाया जा सकता था, लेकिन प्रशासन की सख्ती ने हालात बिगाड़ दिए। मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है। सामाजिक संगठनों ने भी इसे मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी बताया है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा या नहीं।
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