Hathras News: उत्तर प्रदेश के C जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां 100 साल की एक बुजुर्ग महिला को परिजनों ने मृत समझ लिया। परिवार में उनके निधन की खबर फैल गई और अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू कर दी गईं। रिश्तेदारों को सूचना मिलने के बाद घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। परिवार के लोग अंतिम विदाई की तैयारी कर ही रहे थे कि अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। करीब एक घंटे बाद बुजुर्ग महिला की सांसें दोबारा चलने लगीं। यह देखकर घर में मौजूद लोग हैरान रह गए। जिस घर में कुछ देर पहले तक रोने-बिलखने की आवाजें सुनाई दे रही थीं, वहां अचानक खुशी का माहौल बन गया। इस घटना की चर्चा अब पूरे सहपऊ कस्बे में हो रही है।
हाथरस के सहपऊ में सामने आया हैरान करने वाला मामला
यह पूरा मामला हाथरस जिले के सहपऊ कस्बे के मोहल्ला बनियाना का बताया जा रहा है। यहां रहने वाली 100 वर्षीय जमीला बेगम पत्नी सूखे खां को रविवार सुबह परिजनों ने मृत समझ लिया था। परिवार के लोगों को लगा कि बुजुर्ग महिला का इंतकाल हो गया है। इसके बाद घर में शोक का माहौल छा गया। परिजनों ने बिना देर किए अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों को उनके निधन की सूचना दे दी। खबर मिलते ही परिवार के सदस्यों के साथ रिश्तेदार भी घर पहुंचने लगे। देखते ही देखते घर पर लोगों की भीड़ जुट गई। परिवार के लोग बुजुर्ग महिला को अंतिम विदाई देने की तैयारी में लग गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यह पूरा घटनाक्रम एक नया मोड़ लेने वाला है।
अंतिम संस्कार की रस्मों के बीच अचानक चलने लगीं सांसें
जमीला बेगम को कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी की जा रही थी। परिजन उनके शव को नहलाने और अंतिम संस्कार से जुड़ी दूसरी रस्में पूरी करने में जुटे हुए थे। इसी दौरान करीब एक घंटे बाद अचानक महिला की सांसें चलती दिखाई दीं। यह देखकर वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए। परिवार के सदस्यों ने जब उन्हें दोबारा सांस लेते देखा तो किसी को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। कुछ समय पहले तक जिनके इंतकाल की खबर रिश्तेदारों तक पहुंचाई जा चुकी थी, उन्हें फिर से सांस लेते देख हर कोई हैरान रह गया। इसके बाद परिजनों ने उन्हें वापस चारपाई पर लिटा दिया। घर में छाया मातम अचानक खुशी में बदल गया। हालांकि, महिला की स्थिति और सांसें दोबारा चलने के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर कोई चिकित्सकीय पुष्टि सामने नहीं आई है।
पिछले चार-पांच महीनों से चारपाई पर थीं जमीला बेगम
परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक, जमीला बेगम की उम्र करीब 100 साल है। वह पिछले चार से पांच महीनों से चारपाई पर ही रह रही थीं। अधिक उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण वह खुद उठकर चलने-फिरने में असमर्थ थीं। ऐसे में परिवार के सदस्य ही उनकी देखभाल करते थे। रविवार सुबह उनकी स्थिति देखकर परिजनों को लगा कि अब उनकी सांसें थम चुकी हैं। इसी आशंका के चलते परिवार ने उनके निधन की सूचना सभी रिश्तेदारों को दे दी। जमीला बेगम की तीन बेटियां और उनके दामाद भी सूचना मिलने पर घर पहुंच चुके थे। परिवार के लिए यह समय बेहद भावुक कर देने वाला था। एक तरफ मां को खोने का दुख था, तो दूसरी तरफ अचानक सांसें चलने की घटना ने सभी को चौंका दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया।
बेटे टिम्मा ने बताई पूरी घटना, इलाके में हो रही चर्चा
जमीला बेगम के बड़े बेटे टिम्मा ने बताया कि रविवार सुबह उन्हें लगा था कि उनकी मां का निधन हो गया है। इसके बाद उन्होंने परिवार के सभी रिश्तेदारों को सूचना दे दी थी। उनकी तीनों बेटियां और दामाद भी घर पहुंच गए थे। टिम्मा के मुताबिक, मां को नहलाने और अंतिम संस्कार की अन्य रस्में पूरी करने के दौरान अचानक उनकी सांसें दोबारा चलने लगीं। इसके बाद परिवार के लोगों ने उन्हें तुरंत वापस चारपाई पर लिटा दिया। इस घटना के बाद से सहपऊ कस्बे और आसपास के इलाकों में इसकी खूब चर्चा हो रही है। हालांकि, इस तरह की स्थिति में किसी व्यक्ति की मृत्यु की पुष्टि केवल योग्य चिकित्सक की जांच से ही की जानी चाहिए। सांसों का धीमा होना या अन्य शारीरिक संकेतों को देखकर खुद से मृत्यु मान लेना खतरनाक हो सकता है। इसलिए ऐसी किसी भी परिस्थिति में अंतिम संस्कार की तैयारी करने से पहले चिकित्सकीय पुष्टि कराना बेहद जरूरी है।
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