उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बयान चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। प्रयागराज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने माफिया डॉन अतीक अहमद से जुड़ा 22 साल पुराना किस्सा सुनाया, जिसने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान की वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रही है। अपने संबोधन में केशव मौर्य ने उस दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी आया था जब वह मरने-मारने तक की स्थिति में पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि उस दौरान उनके मन में यह विचार आया था कि अगर किसी को मारना पड़ा तो वह अतीक अहमद ही होगा। उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि भाजपा समर्थक इसे उनके संघर्ष और पुराने राजनीतिक दौर से जोड़कर देख रहे हैं। खास बात यह है कि यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनावों की चर्चाएं धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं।
2004 के चुनाव प्रचार का सुनाया पूरा किस्सा
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि यह घटना साल 2004 के उपचुनाव के दौरान की है। उस समय वह पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने से पहले वह विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े थे और हिंदुत्व के मुद्दों पर सक्रिय रहते थे। चुनाव प्रचार के दौरान एक दिन उनकी गाड़ी और अतीक अहमद की गाड़ी आमने-सामने आ गई। इसी दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच विवाद शुरू हो गया। केशव मौर्य ने कहा कि उस समय दोनों तरफ तनाव इतना बढ़ गया था कि स्थिति कभी भी हिंसक हो सकती थी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के लोगों के पास हथियार थे और माहौल बेहद गंभीर हो गया था। मौर्य के अनुसार उनके पास भी लाइसेंसी राइफल थी और उस समय उन्होंने सोच लिया था कि अगर लड़ाई होगी तो सीधे अतीक अहमद से ही मुकाबला करेंगे। उनके बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोग भी हैरान नजर आए। इस पुराने किस्से को सुनाते हुए मौर्य ने उस दौर की राजनीति और माहौल का जिक्र किया, जब प्रयागराज में अपराध और राजनीति का रिश्ता अक्सर चर्चा में रहता था।
नारेबाजी और तनावपूर्ण माहौल का भी किया जिक्र
केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में उस दिन के माहौल का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब दोनों पक्ष आमने-सामने आए तो माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया था। अतीक अहमद के समर्थकों की ओर से ‘नारा-ए-तकबीर अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए जा रहे थे, जबकि उनकी तरफ से ‘जय श्री राम’ के नारे गूंज रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय ऐसा लग रहा था कि कभी भी बड़ा टकराव हो सकता है। हालांकि बाद में मामला शांत हो गया और कोई बड़ी घटना नहीं हुई। लेकिन उस दिन की घटना आज भी उनके जेहन में ताजा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केशव मौर्य ने इस किस्से को सुनाकर खुद को एक संघर्षशील और मजबूत नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के बयान समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं और नेताओं को शब्दों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी लोग इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
2027 चुनाव से पहले बयान के राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य का यह बयान केवल पुराने किस्से को याद करना भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है। उत्तर प्रदेश में भाजपा लगातार हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रही है। ऐसे में मौर्य का यह बयान पार्टी समर्थकों के बीच एक खास संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे चुनावी माहौल बनाने की रणनीति बता रहे हैं। अतीक अहमद की मौत के बाद भी उसका नाम अक्सर यूपी की राजनीति में चर्चा का विषय बना रहता है। प्रयागराज और आसपास के इलाकों में अतीक का प्रभाव लंबे समय तक रहा था और उसकी राजनीतिक पहचान भी काफी मजबूत मानी जाती थी। अब जब केशव मौर्य ने उससे जुड़ा पुराना किस्सा सार्वजनिक मंच पर साझा किया है तो यह बयान स्वाभाविक रूप से सुर्खियों में आ गया है। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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