पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। शुभेंदु अधिकारी ने अब सभी मदरसों में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम केवल सरकारी मदरसों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सहायता प्राप्त, गैर सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त सभी मदरसों पर लागू होगा। सरकार की ओर से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि क्लास शुरू होने से पहले होने वाली प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत गाना जरूरी होगा। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है क्योंकि इसे शिक्षा और राष्ट्रभक्ति से जुड़े बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं कई लोग इसे राज्य सरकार की नई शिक्षा नीति का हिस्सा मान रहे हैं।
मदरसा शिक्षा विभाग ने जारी किया नया आदेश
राज्य के अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अब तक लागू सभी पुराने नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव करते हुए यह नया निर्देश लागू किया जा रहा है। आदेश के अनुसार पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी मॉडल मदरसे, सहायता प्राप्त मदरसे, मंजूर एमएसकेएस, मंजूर एसएसकेएस और मान्यता प्राप्त गैर सहायता प्राप्त मदरसों में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य होगा। मदरसा एजुकेशन के डायरेक्टर ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम छात्रों में राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। विभाग ने साफ किया है कि सभी मदरसा प्रशासन और संस्था प्रमुखों को आदेश का पालन सुनिश्चित करना होगा।
स्कूलों के बाद अब मदरसों तक पहुंची नई नीति
दरअसल, राज्य सरकार इससे पहले 14 मई 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में भी ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य कर चुकी है। उस समय अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले होने वाली प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत गाया जाएगा। अब सरकार ने उसी नीति को आगे बढ़ाते हुए मदरसों में भी इसे लागू कर दिया है। माना जा रहा है कि सरकार राज्य की सभी शिक्षण संस्थाओं में एक समान प्रार्थना व्यवस्था लागू करना चाहती है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ लोग इसे राष्ट्रीय एकता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इस पर सवाल उठा सकते हैं। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला शिक्षा संस्थानों में सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत करने के लिए लिया गया है।
आदेश के बाद बढ़ी चर्चा, अब सबकी नजर लागू होने पर
राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर है कि मदरसों में इसे किस तरह लागू किया जाएगा। कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसलों का असर सीधे छात्रों के वातावरण और संस्थानों की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। वहीं मदरसा प्रशासन को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि सभी शिक्षण संस्थानों में नियमों का पालन सख्ती से कराया जाएगा। बंगाल की राजनीति में शिक्षा और धार्मिक संस्थानों को लेकर पहले भी बहस होती रही है, ऐसे में यह नया फैसला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल राज्य सरकार इसे एक प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार के रूप में पेश कर रही है, जबकि आम लोगों के बीच भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।
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