Bijnor Suicide Case:उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल रोडवेज विभाग को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि मानवीय रिश्तों और मानसिक तनाव के गंभीर पहलुओं को भी उजागर किया है। बिजनौर डिपो के परिसर में खड़ी एक बस बुधवार की सुबह मातम का गवाह बन गई। रोज की तरह काम पर निकले एक चालक की जिंदगी का सफर उसी बस के भीतर समाप्त हो गया, जिसे वह वर्षों से सड़कों पर दौड़ाता था। जब बस का कंडक्टर सुबह की ड्यूटी के लिए पहुँचा, तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि बस का दरवाजा खोलते ही उसके सामने उसके साथी की लाश लटकी होगी। इस घटना के बाद डिपो में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस को सूचना दी गई।
बस का दरवाजा खुलते ही सन्न रह गया कंडक्टर
बिजनौर रोडवेज डिपो में रोजाना की तरह बसों की आवाजाही जारी थी। एक बस जो अपने निर्धारित रूट पर जाने के लिए तैयार खड़ी थी, उसका कंडक्टर जैसे ही अंदर दाखिल हुआ, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। बस की छत के सहारे ड्राइवर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में लटका हुआ था। कंडक्टर की चीख सुनकर आसपास मौजूद अन्य कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी मौके पर दौड़े। हर कोई यह देखकर दंग था कि आखिर कुछ घंटों पहले तक ठीक नजर आने वाले उनके साथी ने ऐसा कदम क्यों उठाया। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को फंदे से उतारा और छानबीन शुरू की। प्राथमिक तौर पर यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन बस के भीतर इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
घरेलू कलह से गई जान
पुलिस की शुरुआती जांच और मृतक के करीबियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस खौफनाक कदम के पीछे की वजह पारिवारिक विवाद बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि चालक का अपनी पत्नी के साथ पिछले कुछ समय से तनाव चल रहा था। घटना वाली रात भी फोन पर दोनों के बीच काफी तीखी बहस हुई थी। बताया जा रहा है कि विवाद इतना बढ़ गया था कि चालक गहरी मानसिक पीड़ा में था। अक्सर रोडवेज कर्मचारी लंबी ड्यूटी और घर से दूर रहने के कारण तनाव में रहते हैं, और ऐसे में घरेलू कलह ‘आग में घी’ का काम करती है। पुलिस अब ड्राइवर के मोबाइल फोन को कब्जे में लेकर उन आखिरी कॉल्स और मैसेज की जांच कर रही है, जो उसकी मौत से ठीक पहले किए गए थे।
डिपो में पसरा सन्नाटा
इस दुखद खबर के फैलते ही रोडवेज कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक ड्राइवर के साथ काम करने वाले अन्य चालकों ने बताया कि वह बहुत ही शांत और मिलनसार स्वभाव का व्यक्ति था। वह अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाता था और कभी उसने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को काम पर हावी नहीं होने दिया। साथियों का कहना है कि किसी को अंदाजा नहीं था कि वह अंदर ही अंदर इतना टूट चुका है कि मौत को गले लगा लेगा। डिपो में खड़े कर्मचारी इस बात को लेकर भी दुखी हैं कि अगर किसी ने समय रहते उसकी परेशानी को भांप लिया होता, तो शायद आज एक जान बच सकती थी। फिलहाल, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।
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