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कामवाली संग आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया पति! राज खुलते ही पत्नी पर किया हमला, सनसनीखेज खुलासे

जयपुर के अनु मीणा सुसाइड केस में FIR के जरिए बड़े खुलासे हुए हैं। परिवार ने पति गौतम मीणा पर कामवाली से अवैध संबंध, मारपीट और गैस चैंबर बनाकर जान लेने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

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जयपुर में चर्चित अनु मीणा सुसाइड केस में अब नए और सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में मृतका के भाई नीरज ने आरोप लगाया है कि अनु का पति गौतम मीणा लंबे समय से उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। दोनों की शादी 25 जुलाई 2015 को हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद ही रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा। परिवार का कहना है कि शादी के बाद उन्हें पता चला कि गौतम शराब पीने का आदी है और नशे की हालत में अक्सर अनु के साथ मारपीट और गाली-गलौज करता था। हर बार वह माफी मांगकर मामला शांत कर देता था, लेकिन अत्याचार लगातार जारी रहा। आखिरकार लगातार तनाव और प्रताड़ना से परेशान होकर अनु ने 7 अप्रैल को आत्महत्या कर ली।

दीपावली की सफाई में खुला बड़ा राज

एफआईआर के मुताबिक पिछले साल दीपावली के दौरान अनु अपने पति के साथ गांव चितवाड़ी गई थी। वहां बच्चों को नाना-नानी के पास छोड़ दिया गया था। इसी दौरान अनु ने कथित तौर पर अपने पति को घर में काम करने वाली महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया। यह दृश्य देखकर वह पूरी तरह टूट गई। आरोप है कि जब अनु ने विरोध किया तो गौतम बौखला गया और उसने उसके साथ मारपीट की। घटना के बाद अनु ने अपनी मां को फोन कर पूरी बात बताई। परिवार के लोग गांव पहुंचे तो गौतम ने हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में ऐसा न करने का भरोसा दिया। हालांकि परिजनों का कहना है कि यह पहली बार नहीं था जब उसने अपनी गलती मानकर मामला दबाने की कोशिश की हो।

गैस चैंबर बनाकर मारने की कोशिश का आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। अनु के भाई ने पुलिस को बताया कि 13 मार्च की रात गौतम ने अनु और दोनों बच्चों को घर के अंदर बंद कर दिया था। आरोप है कि उसने एलपीजी गैस ऑन कर दी और वहां से चला गया। पूरी रात घर गैस से भरा रहा और किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहा। सुबह पड़ोसियों की मदद से किसी तरह दरवाजा खुलवाकर अनु और बच्चों को बाहर निकाला गया। परिवार का कहना है कि यह साफ तौर पर जान लेने की कोशिश थी। इसके बावजूद अनु अपने पति को छोड़ना नहीं चाहती थी। वह अक्सर कहती थी कि गौतम अकेला है, उसके माता-पिता नहीं हैं और उसे संभालने वाला कोई नहीं है। इसी सोच के कारण वह बार-बार समझौता करती रही।

समझौते के दबाव में चुप रहा परिवार

अनु की मौत के करीब 38 दिन बाद, 15 मई को परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान समाज के कुछ लोग लगातार समझौते का दबाव बनाते रहे। भाई नीरज का कहना है कि परिवार को उम्मीद थी कि शायद समय के साथ गौतम सुधर जाएगा, लेकिन हालात और खराब होते गए। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और एफआईआर में लगाए गए आरोपों के आधार पर सबूत जुटाए जा रहे हैं। इस केस ने एक बार फिर घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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