उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की राजनीति इन दिनों एक बयान को लेकर अचानक गर्मा गई है। आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल द्वारा जनसंवाद कार्यक्रम में दिया गया एक बयान अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। मंत्री ने मंच से कहा कि भाजपा में “फेसबुकिया नेताओं” की भरमार हो गई है और अगर किसी में दम है तथा “मां का दूध पिया है” तो सामने आकर चुनाव लड़कर दिखाए। मंत्री का यह बयान कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद भाजपा नेता राजाबक्श सिंह ने भी उसी अंदाज में जवाब देकर सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी। हरदोई सदर सीट को लेकर अब राजनीतिक चर्चाएं तेज हो चुकी हैं और आने वाले समय में यह बयानबाजी बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले सकती है।
जनसंवाद कार्यक्रम में मंत्री ने साधा ‘फेसबुकिया नेताओं’ पर निशाना
शनिवार शाम हरदोई में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मंत्री नितिन अग्रवाल स्थानीय लोगों से संवाद कर रहे थे। कार्यक्रम में विकास कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया और मोहल्लों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा भी हुई। इसी दौरान मंत्री ने बिना किसी का नाम लिए उन नेताओं पर हमला बोला जो सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग फेसबुक पर राजनीति कर खुद को बड़ा नेता समझने लगे हैं, लेकिन असली ताकत जनता के बीच जाकर ही साबित होती है। मंत्री ने कहा कि अगर किसी को राजनीति करनी है तो खुले मैदान में आकर मुकाबला करना चाहिए। उनके बयान में चुनावी चुनौती का साफ संकेत दिखाई दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल सामान्य टिप्पणी नहीं बल्कि हरदोई की अंदरूनी राजनीति की ओर इशारा करता है, जहां टिकट और नेतृत्व को लेकर लंबे समय से खींचतान की चर्चा होती रही है।
राजाबक्श सिंह ने सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब
मंत्री का बयान वायरल होने के बाद भाजपा नेता राजाबक्श सिंह ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनौती स्वीकार करने का एलान कर दिया। उन्होंने लिखा कि “चुनौती स्वीकार थी और स्वीकार है, आने वाले समय में हरदोई सदर की जनता बताएगी किसने मां का दूध पिया है। मैंने तो क्षत्राणी का दूध पिया है।” इस बयान के बाद दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई लोग इसे भाजपा के भीतर बढ़ती गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि बाद में मंत्री नितिन अग्रवाल ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा उन लोगों की तरफ था जो लगातार चुनाव लड़ने के दावे कर पार्टी अनुशासन को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति टिकट का दावेदार हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से चुनाव लड़ने की चुनौती देना अनुशासनहीनता माना जा सकता है। इसके बावजूद दोनों नेताओं के बीच छिड़ी यह बयानबाजी अब जिले की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है।
पुरानी चुनावी प्रतिद्वंद्विता फिर आई चर्चा में
हरदोई की राजनीति में नितिन अग्रवाल और राजाबक्श सिंह की प्रतिद्वंद्विता नई नहीं है। दोनों नेता पहले भी विधानसभा चुनावों में आमने-सामने आ चुके हैं। वर्ष 2012 में नितिन अग्रवाल समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे, जबकि राजाबक्श सिंह बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार थे। उस चुनाव में नितिन अग्रवाल ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों नेताओं के बीच मुकाबला हुआ। उस समय राजाबक्श सिंह भाजपा के प्रत्याशी थे और नितिन अग्रवाल सपा से मैदान में थे, लेकिन परिणाम फिर नितिन के पक्ष में गया। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा ने नितिन अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया, जबकि राजाबक्श सिंह चुनावी मैदान में नजर नहीं आए। अब एक बार फिर दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू होने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या हरदोई की राजनीति में आने वाले समय में बड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस बयान की चर्चा जोरों पर है।
