उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP विक्रम सिंह राठौर ने हाल ही में दिए इंटरव्यू में अतीक अहमद के खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि शाहगंज थाने में अतीक ने खुद कबूल किया था कि उसके संबंध केवल स्थानीय अपराधियों तक सीमित नहीं थे, बल्कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) तक फैले हुए थे। विक्रम सिंह ने कहा कि अतीक का नेटवर्क पंजाब की सीमा तक सक्रिय था और ड्रोन के माध्यम से हथियार सप्लाई की जाती थी। अतीक ने इस नेटवर्क को चलाने के लिए दो स्थानीय अपराधियों रॉकी और डिंपी को लगाया था, जो सीधे तौर पर उसके और मुख्तार अंसारी के लिए काम करते थे।
मेड इन पाकिस्तान कारतूस और हथियारों का इस्तेमाल
पूर्व DGP विक्रम सिंह ने इंटरव्यू में बताया कि अतीक के घर के पास कई बंदूक की दुकानें थीं, फिर भी वह जानबूझकर पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के बने कारतूस इस्तेमाल करता था। उसके पास से ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखे कई कारतूस बरामद हुए थे। इसके अलावा, उसने राजू पाल और उमेश पाल की हत्या के लिए AK-47 और पोर्टेबल 455 पिस्तौल जैसे घातक हथियार मंगवाए। विक्रम सिंह के अनुसार, अतीक केवल बाहुबली नहीं था, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था। उसका नेटवर्क नकली नोट (FICN) और RDX सप्लाई करने के उद्देश्य से पाकिस्तान से जुड़ा था।
फिल्म ने बढ़ाई विवादों की गर्मी
धुरंधर-द रिवेंज फिल्म में अतीक अहमद को जिस तरह पेश किया गया, उसने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने फिल्म के इस चित्रण पर आपत्ति जताई, लेकिन पूर्व DGP विक्रम सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि फिल्म में दिखाया गया पाक और ISI कनेक्शन वास्तविकता के करीब है। उन्होंने कहा कि अतीक का नेटवर्क केवल यूपी तक ही सीमित नहीं था, बल्कि नेपाल और बिहार तक फैला हुआ था। इस नेटवर्क का मकसद भारत की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित करना था, जिसे फिल्म में दर्शाना जरूरी था।
पूर्व DGP का चेतावनी भरा बयान
विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया कि अतीक केवल एक स्थानीय अपराधी नहीं था। उसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था। उन्होंने बताया कि भारत और नेपाल की सीमा पर फैले इस नेटवर्क को रोकने के लिए कई बड़े ऑपरेशन किए गए। उनका कहना है कि अतीक और उसके सहयोगियों का प्रभाव खतरनाक था और उनका असर पूरे यूपी और आस-पास के राज्यों में महसूस किया गया। विक्रम सिंह ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में ऐसे नेटवर्क को रोकने के लिए कड़ी निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।
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