उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए साफ कर दिया है कि बाहय क्रय केंद्रों पर लोडिंग-अनलोडिंग के नाम पर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार पहले ही आदेश दे चुकी है कि किसानों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद कुछ स्थानों पर शिकायतें सामने आने लगी थीं। इसी को देखते हुए गन्ना विभाग ने अब और कड़े कदम उठाने की तैयारी कर ली है। गन्ना आयुक्त मिनिस्टी एस. ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी केंद्र पर किसान उत्पीड़न की जानकारी मिली तो सीधे जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिल पर तय की जाएगी और कार्रवाई में किसी को भी रियायत नहीं मिलेगी।
उन्होंने बताया कि पेराई सत्र 2025-26 के दौरान अब तक 2136 गन्ना क्रय केंद्रों का गहन निरीक्षण किया जा चुका है, जिसमें कई स्थानों पर अनियमितताएं देखने को मिलीं। विभाग की टीमों ने खास तौर पर किसानों से अवैध खरीद-फरोख्त और वजन प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों पर कार्रवाई तेज कर दी है।
अवैध गन्ना खरीद पर दो एफआईआर
निरीक्षण के दौरान कुछ केंद्रों पर बड़े स्तर पर अवैध खरीद-फरोख्त के मामले भी उजागर हुए। विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो मामलों में एफआईआर दर्ज कराई है। ये मामले मुख्य रूप से करीमगंज और रामपुर की चीनी मिलों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसी के साथ सहकारी गन्ना विकास समिति बीसपुर क्षेत्र में भी अवैध गन्ना खरीद पर दो व्यक्तियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।
कार्रवाई की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि विभाग ने 49,816 रुपये मूल्य का गन्ना मौके पर ही जब्त कर लिया। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और विभाग का कहना है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर न सिर्फ एफआईआर होगी, बल्कि लाइसेंस निलंबन, आर्थिक दंड और अन्य कानूनी कार्रवाई भी तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।
निरीक्षण में सामने आए गंभीर मामले
गन्ना आयुक्त ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कुल 8 गंभीर प्रकरण सामने आए, जिन पर तुरंत नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा 120 सामान्य अनियमितताएं भी मिलीं, जिन पर सुधार के निर्देश दिए गए हैं। वजन में गड़बड़ी या किसानों को सही जानकारी न देने जैसी शिकायतों को लेकर 8 तौल लिपिकों के लाइसेंस भी निलंबित कर दिए गए।
विभाग का कहना है कि किसान हितों के ख़िलाफ़ काम करने पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू है। इसका मतलब है कि चाहे अधिकारी हो या कर्मचारी, यदि वह किसानों के शोषण या अवैध वसूली में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ तुरंत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मकसद है कि किसान बिना किसी दबाव, डर या अतिरिक्त खर्च के सीधे क्रय केंद्र पर अपनी फसल बेच सकें।
धान खरीद की रफ्तार धीमी, पिछले वर्ष से 4 लाख टन कम खरीद
इधर धान खरीद को लेकर प्रदेश में स्थिति बहुत उत्साहजनक नहीं दिख रही है। लगभग सवा दो महीने के अभियान में पूरे यूपी में केवल 14 लाख मीट्रिक टन धान खरीद ही हो सकी है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह खरीद 18 लाख मीट्रिक टन के करीब थी।
पश्चिमी यूपी में धान खरीद एक अक्टूबर से और पूर्वी यूपी में एक नवंबर से शुरू की गई थी, लेकिन अब तक खरीद की गति उम्मीद से काफी कम है। किसान संगठनों का मानना है कि खरीद केंद्रों की संख्या, परिवहन व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया को और तेज करने की जरूरत है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो। सरकार की ओर से खरीद एजेंसियों को आदेश दिए गए हैं कि वे केंद्रों पर किसानों से जुड़ी समस्याओं को तत्काल हल करें और खरीद को गति दें।
