लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उन्होंने अदालत से यह अनुरोध किया था कि उनकी बेटी की परीक्षा के चलते उन्हें कुछ दिनों के लिए लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर विचार करते हुए कहा कि 25 दिसंबर से 1 जनवरी 2026 तक वह लखीमपुर खीरी जा सकते हैं। यह अनुमति सीमित अवधि के लिए है और इस दौरान उन्हें अदालत द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना होगा। इससे पहले उनकी जमानत की शर्तों में लखीमपुर खीरी जाने पर सख्त पाबंदी थी।
पीड़ित पक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान पीड़ित किसानों के परिवारों ने अदालत के सामने यह शिकायत रखी कि आशीष मिश्रा पहले ही कई बार जमानत शर्तों का उल्लंघन कर चुके हैं। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद वह लखीमपुर खीरी में सार्वजनिक रैली में शामिल हुए थे। पीड़ित पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी के बार-बार शर्तें तोड़ने से उनके परिवार पर दबाव बनता है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मामले में जांच के निर्देश दिए थे और साफ किया था कि मामले की निगरानी सीधे अदालत करेगी।
2021 की घटना ने हिला दिया था देश
तीन अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक एसयूवी ने किसानों की भीड़ को कुचल दिया, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई। इसके बाद स्थितियाँ और भयावह हो गईं और हिंसा में चार और लोगों की जान चली गई। इस घटना ने देशभर में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था और किसान संगठनों ने लंबे समय तक न्याय की मांग उठाई। लगातार बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने आशीष मिश्रा को गिरफ्तार किया और मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चला।
अदालत की शर्तों के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली इस सीमित अनुमति के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष का कहना है कि आरोपी को बार-बार राहत मिल रही है, जबकि किसानों की मौत का मामला अभी पूरी तरह सुलझा भी नहीं है। वहीं सरकार और आशीष मिश्रा के समर्थकों का दावा है कि अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला दिया है और यह सिर्फ बेटी की परीक्षा को ध्यान में रखते हुए दी गई अनुमति है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह अस्थायी राहत है और आरोपी किसी भी तरह की ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकता जिससे मामले की जांच या गवाहों की सुरक्षा प्रभावित हो। आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।
Read More-कश्मीर में सेना की तैनाती खंगालने पहुंचा चीनी नागरिक! फिर सुरक्षा एजेंसियों ने की ऐसी कार्यवाही
