समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर चर्चा में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब उनसे लखनऊ स्थित अपने जोनल कार्यालय में पूछताछ करना चाहता है। इसके लिए जांच एजेंसी दिवाली के बाद अदालत में कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल करने की तैयारी कर रही है। मामला रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में खर्च हुई 430 करोड़ रुपये से अधिक की रकम के स्रोत से जुड़ा है। ED यह जानना चाहती है कि इतनी बड़ी धनराशि कहां से आई और निर्माण में इसका इस्तेमाल किस तरह किया गया। आजम खान यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति हैं और इसी वजह से जांच एजेंसी उनसे इस मामले में जवाब मांग रही है।
पहले भी हुई पूछताछ, लेकिन अब रिमांड पर लेने की तैयारी
जानकारी के मुताबिक, ED इससे पहले भी आजम खान से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि, जांच एजेंसी को कुछ सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसी के बाद अब उन्हें अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी का मानना है कि कस्टडी रिमांड मिलने पर यूनिवर्सिटी के निर्माण में खर्च हुई रकम और उसके स्रोत से जुड़े सवालों पर विस्तार से जानकारी ली जा सकेगी। फिलहाल रिमांड को लेकर अंतिम फैसला अदालत को करना है। जांच एजेंसी की अर्जी और उस पर कोर्ट का रुख इस मामले की अगली दिशा तय करेगा।
जमानत के बाद भी नहीं मिली राहत
आजम खान को 31 अक्टूबर को जेल से जमानत पर रिहाई मिलने वाली थी, लेकिन जेल से बाहर आते ही ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके अगले दिन, एक नवंबर को जांच एजेंसी ने उन्हें गाजियाबाद की अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। इससे पहले 29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जमानत दी थी। लगातार कानूनी कार्रवाई के बीच आजम खान ने कहा था कि उन्हें मुसलमान होने की सजा मिल रही है और यूनिवर्सिटी बनाना उनकी गलती साबित हो रहा है। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम ने भी इसी तरह की बात कही थी। हालांकि, ये उनके व्यक्तिगत बयान हैं।
आजम खान के समर्थन में पोस्टर, सपा की राजनीति में भी हलचल
आजम खान की गिरफ्तारी के बाद रामपुर में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। शहर के कई इलाकों में उनके समर्थकों की ओर से पोस्टर लगाए जाने की खबर सामने आई थी। इन पोस्टरों में समाजवादी पार्टी की जगह ‘आजमवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया गया और लिखा गया था कि जेल के ताले टूटेंगे, आजम खान छूटेंगे। जमानत मिलने के तुरंत बाद हुई गिरफ्तारी को उनके समर्थक राजनीतिक कार्रवाई बता रहे हैं। वहीं, ED की ओर से की जा रही जांच का केंद्र जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में खर्च हुई रकम का स्रोत है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि अदालत कस्टडी रिमांड की मांग पर क्या फैसला सुनाती है और पूछताछ में कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं।
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