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दिल्ली में पुलिस vs पुलिस! मुख्यालय के बाहर वर्दीधारियों का प्रदर्शन, आखिर अपने ही अफसरों से क्यों नाराज हुए जवान?

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में जवानों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ के तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया। जानिए शाहदरा थाने की झड़प से शुरू हुए पूरे विवाद की वजह।

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दिल्ली में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे के अंदर चल रही नाराजगी को सबके सामने ला दिया है। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी जुटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रदर्शन करने वाले भी पुलिस विभाग के जवान हैं और उन्हें समझाने तथा नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी पुलिस अधिकारियों के पास ही है। जवानों की नाराजगी एक एसीपी के तबादले को लेकर बताई जा रही है। मुख्यालय के बाहर बढ़ती भीड़ को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के भीतर तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प से शुरू हुआ विवाद

इस विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई झड़प से हुई थी। थाने के अंदर पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच किसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों में टकराव हो गया। इस घटना में एक वकील के सिर पर गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी। इसके बाद दिल्ली के वकीलों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया और एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। वकीलों ने आरोप लगाया था कि विवाद के दौरान एसीपी ने पिस्टल लहराई थी। इसी मांग के बीच दिल्ली पुलिस ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ का तबादला कर दिया। अब इसी फैसले को लेकर पुलिस विभाग के कुछ जवानों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

एसीपी ने वीडियो जारी कर जवानों से की खास अपील

तबादले के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने भी एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने उन पुलिसकर्मियों का आभार जताया, जो उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना से वह कमजोर नहीं हुए, बल्कि पहले से अधिक मजबूत महसूस कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने समर्थकों से केवल प्रदर्शन करने के बजाय पुलिस मुख्यालय में खुली बातचीत की मांग उठाने की अपील की। एसीपी ने कहा कि पुलिस आयुक्त के साथ एक ओपन डिस्कशन होना चाहिए, जिसमें ज्यादा से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हों। जो जवान वहां नहीं पहुंच सकते, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी बात रख सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इस बैठक में घटना से जुड़े सभी पहलुओं और हुए समझौतों पर सवाल-जवाब होने चाहिए।

पुलिस कमिश्नर से सीधे जवाब मांगने की तैयारी, आगे क्या होगा?

एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने पुलिस आयुक्त से अपील की है कि उन्हें पुलिसकर्मियों के साथ खुलकर बातचीत करने का अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि जवान विभाग से जुड़े सवाल और अपनी चिंताएं वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखना चाहते हैं। दूसरी तरफ, मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे जवानों को अधिकारी लगातार समझाने में जुटे हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस विभाग की ओर से बातचीत और स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस मुख्यालय में ओपन डिस्कशन की मांग स्वीकार की जाएगी और क्या इससे जवानों की नाराजगी दूर हो पाएगी? फिलहाल दिल्ली पुलिस के इस आंतरिक विवाद पर सबकी नजर बनी हुई है।

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