Homeउत्तर प्रदेशअयोध्याराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब...

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब कैसे खुलेगे पैसों का पूरा राज! जानें

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं का निपटारा किया। एसआईटी की चार्जशीट दाखिल, अब ट्रायल में याचिकाकर्ता भी कर सकेंगे मदद। जानिए पूरा मामला।

-

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ा कथित गबन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित याचिकाओं का निपटारा करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत में चलने वाले मुकदमे के दौरान अपनी बात रखने और न्यायिक प्रक्रिया में सहायता करने की अनुमति दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की सच्चाई को लेकर कोई फैसला नहीं सुनाया है। ऐसे में अब सबकी नजरें अयोध्या की निचली अदालत में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाली रकम के साथ आखिर क्या हुआ था और जांच में कौन-कौन सी बातें सामने आई हैं?

चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी का मामला कैसे आया सामने?

राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से बड़ी संख्या में चढ़ावा दिया जाता है। इसी रकम की गिनती और प्रबंधन के दौरान कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया था। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में बताया गया था कि रकम गिनने के काम में लगे कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर पैसे अपने पास रख लिए थे। आरोप यह भी है कि कुछ लोग चढ़ावे से मिली रकम को अपने बैंक खातों में जमा कर रहे थे या दूसरी जगह निवेश कर रहे थे। मामला सामने आने के बाद इसकी जांच विशेष जांच दल यानी एसआईटी को सौंपी गई थी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि चढ़ावे की रकम में कितनी गड़बड़ी हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

- Advertisement -

एसआईटी की चार्जशीट से मामले में आया नया मोड़

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि एसआईटी अपनी जांच पूरी करने के बाद अयोध्या की निचली अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इस जानकारी के सामने आने के बाद अदालत ने मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी। चार्जशीट दाखिल होने का मतलब है कि जांच एजेंसी ने अपनी जांच में जुटाए गए तथ्यों और सबूतों को अदालत के सामने रख दिया है। अब इन दस्तावेजों और सबूतों की जांच ट्रायल के दौरान होगी। निचली अदालत यह तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किस आधार पर आगे बढ़ेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दी बड़ी राहत

मामले में याचिका दाखिल करने वाले लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही में सहायता करने की अनुमति दी है। इसका मतलब है कि वे मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के रूप में अपनी बात रख सकेंगे और अदालत को जरूरी जानकारी देने में मदद कर सकेंगे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया कि उसने अभी तक किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना है और न ही आरोपों को सही या गलत ठहराया है। मामले के सभी पहलुओं पर फैसला ट्रायल कोर्ट में उपलब्ध सबूतों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा।

राम मंदिर की जमीन को लेकर दाखिल याचिका पर भी सुनवाई से इनकार

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने एक दूसरी याचिका भी आई थी। इसमें मांग की गई थी कि अदालत यह स्पष्ट करे कि राम मंदिर का निर्माण उसी जमीन पर हुआ है या नहीं, जिसे मुख्य अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसले के तहत मंदिर निर्माण के लिए निर्धारित किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस नई याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। फिलहाल चढ़ावे की रकम से जुड़े मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया अयोध्या की निचली अदालत में आगे बढ़ेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रायल के दौरान एसआईटी की चार्जशीट में क्या तथ्य सामने आते हैं और अदालत में आरोपों को साबित करने के लिए कौन से सबूत पेश किए जाते हैं।

Read More-दिल्ली में पुलिस vs पुलिस! मुख्यालय के बाहर वर्दीधारियों का प्रदर्शन, आखिर अपने ही अफसरों से क्यों नाराज हुए जवान?

- Advertisement -

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest posts