Lucknow Dhirendra Singh Murder: महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या का मामला लगातार उलझता जा रहा है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हत्यारोपियों ने वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए भी पूरी योजना बनाई थी। धीरेंद्र सिंह को पहले गाड़ी में बेहोश किया गया और फिर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को सुनसान स्थान पर फेंक दिया गया। पुलिस ने इस मामले में चालक रवि कुमार तिवारी और उसके साथी ओमकार को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
चलती गाड़ी में बेहोश किया, फिर मारीं दो गोलियां
पुलिस के मुताबिक, धीरेंद्र प्रताप सिंह को उनके ही वाहन में ले जाया गया था। रास्ते में आरोपियों ने कथित तौर पर रूमाल में किसी नशीले पदार्थ का इस्तेमाल कर उन्हें बेहोश कर दिया। इसके बाद उन पर दो गोलियां चलाई गईं। हत्या के बाद शव को ऐसी जगह पर फेंका गया, जहां उसके जल्दी मिलने की संभावना कम थी। वारदात के बाद धीरेंद्र सिंह की फॉर्च्यूनर गाड़ी को मेदांता अस्पताल के पास छोड़ दिया गया और आरोपी वहां से फरार हो गए। एडीसीपी दक्षिण रल्लापल्ली वसंथ कुमार के अनुसार, जांच में अब तक चार लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें से चालक रवि कुमार तिवारी और गोमतीनगर निवासी ओमकार को पुलिस ने देर रात गिरफ्तार किया है। बाकी दो आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।
10 साल से साथ था ड्राइवर, भरोसे का उठाया फायदा
जांच में पुलिस को पता चला है कि बाराबंकी निवासी रवि कुमार तिवारी करीब दस वर्षों से धीरेंद्र प्रताप सिंह के लिए चालक के तौर पर काम कर रहा था। लंबे समय से साथ रहने के कारण धीरेंद्र सिंह को उस पर काफी भरोसा था। पुलिस का दावा है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसे हत्या की साजिश में शामिल किया गया। उसे कथित तौर पर सुपारी का लालच दिया गया था। हालांकि, अभी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या के लिए कितनी रकम तय हुई थी और साजिश में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। पुलिस के सामने एक और अहम सवाल गनर की ड्यूटी को लेकर है। बताया जा रहा है कि घटना के दिन दोनों गनर ड्यूटी पर नहीं आए थे। आरोप है कि चालक ने दूसरे गनर को भी ड्यूटी पर न आने के लिए तैयार किया था। दोनों गनर उन्नाव पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए थे और अब पुलिस उनसे भी पूछताछ करेगी।
एक मोबाइल ट्रेन में रखकर पुलिस को किया भ्रमित
हत्यारोपियों ने पुलिस की जांच को भटकाने के लिए मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल किया। धीरेंद्र प्रताप सिंह के पास दो मोबाइल फोन थे। आरोप है कि इनमें से एक फोन को ट्रेन में रख दिया गया, जिससे उसकी लोकेशन लगातार बदलती रही। पुलिस ने जब मोबाइल की लोकेशन को ट्रेस किया तो शुरुआत में गोसाईंगंज, हैदरगढ़ और अमेठी के जगदीशपुर इलाके से लोकेशन सामने आई। बाद में मोबाइल की आखिरी लोकेशन चंदौली में मिली। इस तरह पुलिस को काफी देर तक यह समझने में मुश्किल हुई कि धीरेंद्र सिंह वास्तव में कहां हैं। दूसरी तरफ, परिवार से जुड़ी जानकारी के मुताबिक धीरेंद्र सिंह की कोई संतान नहीं थी और उनकी पत्नी ममता को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी थी। रविवार को उनका ऑपरेशन भी होना था। ऐसे में पुलिस अब हत्या के पीछे की पूरी वजह और साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
सेंगर से करीबी के दावे के बीच हमनाम नेता को लेकर फैली अफवाह
धीरेंद्र प्रताप सिंह को उन्नाव की बांगरमऊ सीट से पूर्व विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर का करीबी भी बताया जाता था। सोशल मीडिया पर धीरेंद्र सिंह की भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। बताया गया है कि सेंगर के लखनऊ जिला जेल में रहने के दौरान धीरेंद्र सिंह उनसे मुलाकात करने जाते थे और उनके मामलों की पैरवी भी करते थे। हालांकि, हत्या की असली वजह क्या थी, इसका खुलासा पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही होगा। इस बीच सोशल मीडिया पर एक और गलत खबर फैल गई। धीरेंद्र प्रताप सिंह नाम के हिंदू युवा वाहिनी नेता की हत्या की अफवाह तेजी से वायरल हो गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें फोन कर हाल पूछा। बाद में उन्होंने वीडियो जारी कर बताया कि वह पूरी तरह सुरक्षित हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर हत्या की साजिश, सुपारी और अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
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