उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। चुनाव आयोग ने यूपी के साथ उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए भी चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। दोनों राज्यों की कुल 11 सीटों पर 16 अक्टूबर को वोटिंग होगी। उत्तर प्रदेश में जिन 10 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, उनमें से ज्यादातर सीटों पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है। इन सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होना है। ऐसे में नए चुनाव के बाद राज्यसभा में उत्तर प्रदेश से दलों की स्थिति में बदलाव देखने को मिल सकता है।
बीजेपी की कई सीटों पर नजर, सपा और बसपा की भी सीट शामिल
यूपी की जिन 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, उनमें मौजूदा समय में बीजेपी के आठ सदस्य हैं। इनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा का नाम शामिल है। डॉ. दिनेश शर्मा भी इस सूची में थे, लेकिन अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम की सीट का कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो रहा है। इसलिए इस चुनाव में बीजेपी, सपा और बसपा से जुड़े समीकरणों पर खास नजर रहेगी।
397 विधायक तय करेंगे राज्यसभा का नया गणित
राज्यसभा चुनाव में आम जनता सीधे मतदान नहीं करती। इसमें संबंधित राज्य के निर्वाचित विधायक वोट डालते हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले कुछ समय में छह विधायकों के निधन के कारण फिलहाल 397 सदस्य ही मतदान की प्रक्रिया में शामिल होंगे। मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 वोटों की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए पार्टियों के पास मौजूद विधायकों की संख्या के साथ-साथ अतिरिक्त वोट भी चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उम्मीदवारों की संख्या और अलग-अलग दलों की रणनीति सामने आने के बाद तस्वीर और साफ होगी।
BSP के सामने बढ़ी मुश्किल
इस चुनाव का सबसे ज्यादा असर बहुजन समाज पार्टी पर पड़ सकता है। यूपी विधानसभा में फिलहाल BSP का कोई विधायक नहीं है। पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में बसपा की संख्या शून्य हो गई। ऐसे में राज्यसभा में पार्टी के एकमात्र सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद BSP के पास राज्यसभा में भी कोई सदस्य नहीं बचेगा। मौजूदा विधानसभा संख्या को देखते हुए पार्टी के लिए अपने दम पर राज्यसभा की सीट हासिल करना बेहद मुश्किल है। अब 16 अक्टूबर को होने वाला चुनाव सिर्फ सीटों का चुनाव नहीं होगा, बल्कि इससे यूपी में आने वाले दिनों के राजनीतिक समीकरणों की भी तस्वीर कुछ हद तक सामने आ सकती है।
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