अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच टीम को अब एक ऐसा अहम सुराग मिला है जिसने पूरे केस की दिशा बदल दी है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला के पास सबसे अधिक नकदी बरामद हुई थी। यह मामला लगातार गहराता जा रहा है और हर नई जानकारी के साथ जांच एजेंसियों की चिंता भी बढ़ रही है। मंगलवार (30 जून) को पुलिस ने जेल में जाकर आरोपी से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की और उसके बयान दर्ज किए, जिससे कई नए पहलुओं पर रोशनी पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
बरामद नकदी और शक की वजह
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में अब तक सभी आरोपियों से मिलाकर कुल 79.84 लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा अविनाश शुक्ला से मिला है, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने इस बात पर फोकस बढ़ा दिया है कि आखिर एक आउटसोर्स कर्मचारी के पास इतनी बड़ी रकम कैसे पहुंची। पुलिस को शक है कि यह मामला सिर्फ एक साधारण चोरी नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई संगठित तरीका या अंदरूनी नेटवर्क भी हो सकता है, जिसकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।
जेल में हुई लंबी पूछताछ में उठे कई सवाल
अदालत से अनुमति मिलने के बाद अयोध्या पुलिस ने अविनाश शुक्ला से जेल में गहन पूछताछ की। इस दौरान पुलिस ने यह जानने की कोशिश की कि इतनी बड़ी नकदी उसके पास कैसे आई, क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी और क्या यह चोरी कई दिनों या महीनों से चल रही थी। पुलिस ने यह भी सवाल उठाए कि इस घटना को किस तरीके से अंजाम दिया गया और क्या इसमें और लोग भी शामिल हो सकते हैं। पूछताछ के दौरान उसके बयान को रिकॉर्ड किया गया, ताकि आगे की जांच में मदद मिल सके।
आगे की जांच में बढ़ेगा दायरा
जांच एजेंसियों का मानना है कि अविनाश शुक्ला से मिली जानकारी इस केस को और आगे ले जा सकती है। पुलिस अब अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है और इसके लिए अदालत से अनुमति ली जा सकती है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह मामला केवल व्यक्तिगत स्तर पर हुआ अपराध है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है और जल्द ही कुछ और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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