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‘हां, लापरवाही तो हुई है…’ राम मंदिर दान विवाद में चंपत राय पर क्यों फूटा अपनों का ही गुस्सा? जानिए अंदर की पूरी कहानी!

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर वीएचपी (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का चंपत राय को लेकर अब तक का सबसे बड़ा बयान।

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अयोध्या। उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में निर्मित भव्य राम मंदिर से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन हाल ही में मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में गड़बड़ी के कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का एक बेहद चौंकाने वाला बयान सामने आया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि राम मंदिर परिसर में जो कुछ भी हुआ है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे दुनिया भर के सनातनी भाई-बहनों के दिलों को गहरी ठेस पहुंची है। इस संवेदनशील मुद्दे पर वीएचपी प्रमुख के खुलकर बोलने के बाद अब इस मामले ने एक नया और बड़ा मोड़ ले लिया है।

चंपत राय के इस्तीफे और ‘लापरवाही’ पर वीएचपी का बड़ा कबूलनामा

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की भूमिका पर उठ रहा था। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए आलोक कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए और विशेष जांच (SIT) की शुरुआत होते ही चंपत राय ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। उन्होंने आगे कहा कि किसी ने भी सीधे तौर पर चंपत राय पर पैसे गायब करने का आरोप नहीं लगाया है, बल्कि शक और आरोपों के घेरे में उनका ड्राइवर है। हालांकि, वीएचपी अध्यक्ष ने एक बड़ा और बेबाक बयान देते हुए यह माना कि इस पूरे प्रकरण में चंपत राय से ‘लापरवाही’ जरूर हुई है और वह इसके दोषी हो सकते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि चंपत राय भले ही वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, लेकिन ट्रस्ट में उनकी भूमिका संगठन की तरफ से तय नहीं की गई थी, इसलिए इसके लिए वीएचपी जवाबदेह नहीं है।

राम भक्तों का भरोसा वापस जीतने के लिए अध्यक्ष की 4 बड़ी मांगें

दान के पैसों में हुई इस कथित हेराफेरी के बाद आम जनता के बीच उपजे अविश्वास और आक्रोश को शांत करने के लिए वीएचपी अध्यक्ष ने सरकार के सामने चार बेहद कड़े प्रस्ताव रखे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर राम मंदिर की एक भव्य तस्वीर साझा करते हुए इन मांगों को सार्वजनिक किया। उनकी पहली मांग है कि इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई को पुख्ता करने के लिए तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए। दूसरी मांग में उन्होंने मंदिर के खातों, जमीनों और अन्य कीमती सामानों से जुड़ी जांच को सुपरफास्ट गति से पूरा करने पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने रोज सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट को सक्रिय करने की मांग की है ताकि दोषियों को बिना किसी देरी के उनके किए की कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और जनता के बीच एक कड़ा संदेश जाए।

यूपी सरकार की एसआईटी जांच और अयोध्या में बढ़ता सियासी पारा

मामले की संवेदनशीलता और जनभावनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बिना वक्त गंवाए तीन सदस्यों वाली एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया है। यह विशेष टीम मंदिर में आए गुप्त दान, चढ़ावे के रजिस्टर, जमीनों के हालिया सौदों और गायब हुए कीमती सामानों के एक-एक पन्ने को खंगाल रही है। एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप भी दी है, जिसके बाद से ही अयोध्या के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भारी हलचल है। हालांकि, दूसरी तरफ राम मंदिर ट्रस्ट ने किसी भी तरह के बड़े वित्तीय घोटाले के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। इस बीच, अयोध्या के मेयर से भी मंदिर में सिफारिशों के आधार पर दी जा रही नौकरियों को लेकर तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं, जिसने इस पूरे मामले के सस्पेंस और विवाद को और ज्यादा गहरा कर दिया है।

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