चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी अभिनेता राजपाल यादव को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने पहले उन्हें 5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन तय समय तक पूरी रकम जमा नहीं हो सकी। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की कॉपी पेश की गई। इस पर बेंच ने सवाल किया कि जब 5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश था तो सिर्फ 50 लाख रुपये क्यों पेश किए गए। अदालत ने उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश का पालन गंभीरता से होना चाहिए।
‘आपकी जगह जेल में है’ टिप्पणी से गरमाया मामला
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने राजपाल यादव के रवैये पर बेहद सख्त टिप्पणी की और कहा कि उनकी जगह जेल में है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो अभिनेता की याचिका खारिज करने पर विचार किया जा सकता है। इससे पहले 15 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें 2 करोड़ रुपये जमा करने का अंतिम मौका दिया था और 5 अक्टूबर तक अंतरिम राहत दी थी। अब अदालत ने रकम जमा करने के लिए एक और मौका दिया है।
2010 में लिया था करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज
यह विवाद करीब 15 साल पुराना है। मामला राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। वर्ष 2010 में फिल्म बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद ली गई थी। बाद में रकम लौटाने को लेकर विवाद हुआ और कंपनी को दिए गए सात चेक बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। ट्रायल कोर्ट ने 2018 में राजपाल यादव को दोषी ठहराया था। बाद में सेशंस कोर्ट ने भी दोष बरकरार रखा और सजा को कम करते हुए तीन महीने की जेल की सजा सुनाई। दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को इस फैसले को बरकरार रखा था।
अब आगे क्या होगा, इसी पर टिकी नजर
राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में उन्हें तत्काल जेल जाने से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए रकम जमा करने की शर्त रखी गई थी। 15 सितंबर को कोर्ट ने 2 करोड़ रुपये जमा करने और पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश देते हुए 5 अक्टूबर तक राहत बढ़ाई थी। सोमवार की सुनवाई में पूरी तय रकम जमा न होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। अब राजपाल यादव के मामले में अगली कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अदालत के निर्देशों का किस तरह पालन करते हैं।
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