कानपुर के चर्चित दवा व्यापारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जांच के दौरान नया मोड़ सामने आया है। हत्या के बाद आरोपी बनाकर जेल भेजी गईं उनकी बहू शालू मिनोचा को अब कोर्ट से राहत मिल गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उनकी रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड पर उन्हें तत्काल जेल से छोड़ने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच या सुनवाई के लिए पुलिस और अदालत के सामने पेश होना होगा।
शुरुआती जांच में परिवार पर था शक
यह मामला कल्याणपुर थाना क्षेत्र में हुए विनीत मिनोचा हत्याकांड से जुड़ा है। पुलिस ने घटना के बाद BNS की धारा 103(1) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया था। शुरुआती जांच में पुलिस को पारिवारिक विवाद और हत्या की साजिश का शक था। इसी आधार पर शालू मिनोचा को भी मामले में आरोपी बनाया गया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो पुलिस की केस डायरी में सामने आई जानकारी ने मामले की दिशा बदल दी।
जांच में शालू के खिलाफ नहीं मिला सबूत
विवेचक और निरीक्षक केशव कुमार तिवारी ने जांच से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश किए। पुलिस की विवेचना के अनुसार, हत्या की योजना मृतक के बेटे सुब्रत मिनोचा ने बनाई थी और हत्या को अंजाम दिलाने में भी उसकी भूमिका सामने आई। वहीं, जांच के दौरान शालू के खिलाफ ऐसा कोई स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वह हत्या की साजिश में जानबूझकर शामिल थीं या उन्हें इसकी जानकारी थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ विवेचना समाप्त करने की बात पुलिस ने कोर्ट को बताई।
50 हजार के बॉन्ड पर रिहाई का आदेश
केस डायरी देखने के बाद सीजेएम अदालत ने पुलिस की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि शालू किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो जिला कारागार के अधीक्षक उन्हें 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहा करें। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि भविष्य में पूछताछ या सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर शालू को उपस्थित होना होगा। इस आदेश के बाद विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में एक अहम बदलाव सामने आया है।
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